एयर इंडिया की खराब सेवा के चलते एक बिजनेस क्लास महिला यात्री को 1 लाख रुपये का मुआवजा मिला है. नई दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग ने यह फैसला सुनाया। यात्री ने सैन फ्रांसिस्को से दिल्ली के लिए 2.49 लाख रुपये की टिकट बुक की थी, लेकिन 28-29 फरवरी 2024 की उड़ान के दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. फ्लाइट में ज्यादातर लैवेटरी खराब थीं और 200 से अधिक यात्रियों के लिए सिर्फ दो इकोनॉमी लैवेटरी काम कर रही थीं. इसके अलावा सीट का ट्रे टेबल टूटा और जंग लगा था, लाइफजैकेट कवर व प्राइवेसी स्क्रीन खराब थे और इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम भी बंद था, जिससे पूरी यात्रा असुविधाजनक रही.
28 फरवरी 2024 को शुरू हुई इस लंबी उड़ान में उन्हें आराम और प्रीमियम सेवा की उम्मीद थी, लेकिन सफर के दौरान हालात बिल्कुल उलटी निकली. सीट का ट्रे टेबल टूटा और जंग लगा था, प्राइवेसी स्क्रीन और इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम भी सही से काम नहीं कर रहे थे.
फ्लाइट में मिली कई परेशानी
इस पूरे सफर के दौरान सबसे बड़ी समस्या थी कि फ्लाइट में ज्यादातर लैवेटरी खराब थीं. फर्स्ट क्लास की लैवेटरी भी काम नहीं कर रही थीं. आखिरी दो इकोनॉमी क्लास की लैवेटरी पीछे वाली चल रही थीं, लेकिन उनकी हालत बहुत खराब थी. 200 से ज्यादा पैसेंजर्स के लिए सिर्फ दो लैवेटरी काम कर रही थीं, जो बहुत मुश्किल वाली बात थी. इसके अलावा सीट का ट्रे टेबल पुराना, जंग लगा और टूटा हुआ था. लाइफजैकेट कवर भी डैमेज थे. प्राइवेसी स्क्रीन काम नहीं कर रही थीं. इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट भी बंद थे.
लैंडिंग के बाद महिला ने 1 मार्च 2024 को एयरलाइन को ईमेल किया. एयर इंडिया ने माना कि बिजनेस क्लास सर्विस नहीं दी गई और 10 हजार रुपये का ऑफर किया. महिला ने 26 मार्च को लीगल नोटिस भेजा, तो एयरलाइन ने 15 हजार रुपये ऑफर किए, लेकिन वह मंजूर नहीं किए. फिर 6 मई 2024 को उन्होंने नई दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया. केस नंबर CC/153/2024 था. आयोग के अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्रा ने 5 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया.
यात्री को मिला 1 लाख का हर्जाना
आयोग ने कहा कि एयरलाइन ने सर्विस में कमी की है. उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 के तहत एयरलाइन सर्विस प्रोवाइडर है और पैसेंजर उपभोक्ता. डीजीसीए के नियमों के मुताबिक फंक्शनल लैवेटरी और सीट जरूरी हैं. इनकी कमी से पैसेंजर को शारीरिक असुविधा, मानसिक परेशानी और हैरानी हुई. आयोग ने पुराने केस जैसे राजेश चोपड़ा vs एयर इंडिया और रियर एडमिरल अनिल कुमार सक्सेना बनाम एयर इंडिया का हवाला दिया. एयरलाइन ने कम मुआवजा ऑफर करके गलती मानी, लेकिन आयोग ने ज्यादा मुआवजा दिया.
फाइनल फैसले में एयर इंडिया को 50 हजार रुपये मानसिक परेशानी और हैरानी के लिए और 50 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए देने का आदेश दिया गया. यह फैसला उन यात्रियों के लिए एक मिसाल है, जो महंगी टिकट के बावजूद खराब सेवा का सामना करते हैं.
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यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत पर काम कर रही हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़…और पढ़ें
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