अदालत ने साफ कहा कि लोगों को अच्छी सड़क और सुगम यातायात से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह भी माना कि NHAI किसी दूसरी एजेंसी को काम पूरा करने के लिए नियुक्त कर सकता है. इतना ही नहीं RSIIL की इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया कि नया ठेका देने में कम से कम तीन महीने लगेंगे और वह खुद काम में जरूरी प्रगति दिखा सकता है.
बता दें कि NHAI ने 23 दिसंबर को कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की मंशा का नोटिस दिया था. इसके खिलाफ कंपनी ने पहले एकल जज की बेंच में याचिका दायर की थी, जहां नोटिस पर रोक लग गई थी. इसके बाद एनएचआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने न केवल नोटिस पर लगी रोक को हटाया बल्कि कंपनी को फटकार भी लगाई.
हालांकि हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक एकल जज के सामने कंपनी की याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक एनएचएआई कंपनी की बैंक गारंटी या बीमा बॉन्ड भुना नहीं सकता. लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि NHAI चाहें तो 23 दिसंबर 2025 के नोटिस के आधार पर उचित आदेश पारित कर सकता है और जरूरत पड़ने पर नया टेंडर जारी कर किसी दूसरी एजेंसी से दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज नंबर-8 का काम पूरा करा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, NHAI जल्द ही RSIIL द्वारा बनाए जा रहे दो और हिस्सों के लिए भी क्योर पीरियड नोटिस जारी कर सकता है, जहां काम धीमा है. क्योर पीरियड नोटिस के तहत ठेकेदार को 60 दिन का समय दिया जाता है ताकि वह खामियां दूर कर सके, उसके बाद कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया है कि फिलहाल NHAI ठेकेदार की बैंक गारंटी और बीमा बॉन्ड नहीं भुना सकेगा.
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