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जापान अपनी जीडीपी के 237% कर्ज के साथ दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार देश बन गया है, जबकि अमेरिका, ग्रीस और इटली जैसे देश भी 154% के स्तर पर हैं. भारत 81.9% के साथ 17वें स्थान पर है और सुरक्षित जोन में माना जा रहा है. लेख में यह भी बताया गया है कि कर्ज हमेशा बुरा नहीं होता; यदि वह घरेलू हो और ब्याज दरें कम हों (जैसे जापान), तो उसे मैनेज किया जा सकता है, लेकिन बाहरी कर्ज संकट का कारण बन सकता है.
नई दिल्ली. जापान कभी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी हुआ करता था, लेकिन आज वह खिसककर पांचवें नंबर पर आ गया है. इस गिरावट की एक बड़ी वजह जापान पर चढ़ा कर्ज का भारी बोझ है. वर्तमान में जापान दुनिया का सबसे कर्जदार देश है, जहां सरकार का कर्ज उसकी जीडीपी का 237% तक पहुंच चुका है. साल 2025 के अंत तक जापान का कुल सरकारी कर्ज 1,342 ट्रिलियन युआन (करीब 8.6 ट्रिलियन डॉलर) दर्ज किया गया है, जिसमें से 4.71 ट्रिलियन डॉलर बाहरी कर्ज है.
भारत की बात करें तो इस लिस्ट में हम काफी बेहतर स्थिति में हैं. भारत दुनिया के सबसे कर्जदार देशों की सूची में 17वें नंबर पर आता है, जहां सरकार का कर्ज जीडीपी का 81.9% है. भारत के बाद ऑस्ट्रिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों का नंबर है. खास बात यह है कि भारत का अधिकांश कर्ज घरेलू है और देश की तेज जीडीपी ग्रोथ इसे संभालने की पूरी क्षमता रखती है.
दुनिया के सबसे कर्जदार देश
जापान के बाद दुनिया के कई बड़े और विकसित देश कर्ज के भारी बोझ तले दबे हैं.
| देश / क्षेत्र | कर्ज-जीडीपी अनुपात (%) | स्थिति |
| जापान | 237% | दुनिया में सबसे ज्यादा |
| सिंगापुर | 173% | दूसरे नंबर पर |
| अमेरिका, ग्रीस, इटली, फ्रांस | 154% | सभी एक ही श्रेणी में |
| यूके, चीन, अर्जेंटीना | 154% | भारत से काफी आगे |
| भारत | 81.9% | 17वें स्थान पर |
| जर्मनी | 62.2% | तुलनात्मक रूप से बेहतर |
| स्विट्जरलैंड | 15.7% | बेहद कम कर्ज |
सरकारी कर्ज का गणित
किसी देश पर कर्ज होने का मतलब है कि सरकार ने अपनी जरूरतों के लिए बैंकों, जनता या विदेशी संस्थाओं से पैसा उधार लिया है. लेकिन हर कर्ज बुरा नहीं होता:
- अच्छा कर्ज (जैसे जापान): जापान का कर्ज भले ही बहुत ज्यादा है, लेकिन वह सुरक्षित है क्योंकि यह ज्यादातर घरेलू है. जापानी लोग और बैंक ही अपनी सरकार को पैसा देते हैं. वहां ब्याज दरें बहुत कम (कभी-कभी 0%) होती हैं, इसलिए चुकाने का दबाव कम रहता है.
- बुरा कर्ज (जैसे ग्रीस या श्रीलंका): जब कर्ज विदेशी सरकारों या संस्थानों से लिया जाए और उस पर ब्याज दरें बहुत ऊंची हों, तो वह संकट बन जाता है. अगर ग्रोथ रुक जाए, तो देश डिफॉल्ट की कगार पर पहुंच जाता है.
भारत की स्थिति
भारत का कर्ज मध्यम स्तर का है और इसके पीछे ठोस तर्क हैं:
- घरेलू मजबूती: भारत का ज्यादातर कर्ज अपने ही देश के बैंकों और निवेशकों से लिया गया है.
- तेज रफ्तार: भारत की जीडीपी 6-7% की दर से बढ़ रही है, जिससे कर्ज का बोझ समय के साथ हल्का होता जाता है.
- कंट्रोल में हालात: सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए हुए है, जिससे भारत ‘डेंजर जोन’ से काफी दूर है.
कर्ज की कहानी, आंकड़ों की जुबानी
- विदेशी मुद्रा: सऊदी अरब और रूस जैसे देश अपने संसाधनों के कारण बहुत कम कर्ज पर टिके हैं.
- यूरोपीय यूनियन: ईयू का औसत कर्ज 80.7% है, जो लगभग भारत के बराबर ही है.
- बचत की आदत: जापान की स्थिरता का बड़ा कारण वहां के लोगों की भारी बचत है, जो सरकार को सस्ता उधार उपलब्ध कराती है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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