अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी और कानूनी हलचल के बीच दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप का 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ भारत के लिए कोई बड़ा झटका नहीं है. उनका तर्क है कि जब ज्यादातर देशों पर एक जैसा टैरिफ लगता है, तब किसी एक देश की प्रतिस्पर्धी स्थिति कमजोर नहीं होती.
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ रेट को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है. यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस 6 3 के फैसले के कुछ ही दिन बाद आया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति अपने दम पर टैरिफ तय नहीं कर सकते. इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन अब दूसरे कानूनी रास्तों से नए टैरिफ लगाने की तैयारी में जुटा है.
जब सब पर बराबर टैक्स हो तो नुकसान किसे
समीर अरोड़ा का मूल तर्क सीधा है. अगर किसी एक देश पर ज्यादा और किसी दूसरे पर कम टैरिफ लगे, तभी असली दबाव बनता है. लेकिन जब 90 से ज्यादा देशों पर एक ही रेट लागू हो, तो प्रतिस्पर्धा का गणित लगभग वही रहता है. उन्होंने कहा कि भारत अकेला देश नहीं है जिस पर 15 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर भी शामिल हैं. ऐसे में भारत को अलग से नुकसान में मानना गलत होगा.
अमेरिका की अंदरूनी राजनीति
समीर अरोड़ा का मानना है कि अब टैरिफ ज्यादा अमेरिका की घरेलू टैक्स पॉलिसी जैसा बनता जा रहा है. जब सभी देशों पर लगभग एक जैसा शुल्क है, तो इसका बोझ आखिरकार अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों पर ही पड़ता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले वाला 10 फीसदी टैरिफ भी अपने आप में चौंकाने वाला था, क्योंकि जिस कानूनी ढांचे के तहत यह लगाया गया था, उसकी ऊपरी सीमा ही 15 फीसदी थी. यूरोप, जापान और साउथ कोरिया जैसी इकॉनमी अब लगभग उसी स्थिति में लौट आई हैं, जहां वे पहले थीं.
150 दिन की सीमा और आगे की अनिश्चितता
एक अहम बात यह भी है कि 15 फीसदी टैरिफ फिलहाल करीब 150 दिनों के लिए ही तय किया गया है. समीर अरोड़ा के मुताबिक, अगर इसे पांच महीने से ज्यादा बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी जरूरी होगी. इससे आगे की राह पूरी तरह राजनीतिक सौदेबाजी पर निर्भर हो जाएगी. यह अनिश्चितता अपने आप में एक ब्रेक का काम करती है और बाजारों के लिए यह संकेत देती है कि चीजें इतनी सीधी नहीं हैं, जितनी दिख रही हैं.
अगर भारत पर 18 फीसदी भी लगा तो क्या
समीर अरोड़ा ने इस संभावना पर भी बात की कि अगर भविष्य में अमेरिका के दूसरे ट्रेड कानूनों के तहत भारत पर 18 फीसदी तक टैरिफ लगाया जाता है, तब भी यह कोई बड़ा झटका नहीं होगा. उनके मुताबिक भारत पहले से ही किसी संभावित ट्रेड डील में 18 फीसदी के आसपास के आंकड़े को लेकर तैयार माना जा रहा था. ऐसे में मौजूदा 15 फीसदी को नेगेटिव की बजाय थोड़ा बेहतर स्थिति ही कहा जा सकता है. अमेरिका में कानूनी लड़ाई, कोर्ट के फैसले और राजनीतिक बयानबाजी भले ही सुर्खियां बटोर रही हों, लेकिन समीर अरोड़ा की नजर में भारत की असली तस्वीर बदली नहीं है. उनके शब्दों में, जब सब एक ही नाव में हों, तो किसी एक के डूबने का डर सबसे कम होता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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