एक्सप्रेसवे और हाई स्पीड कॉरिडोर की बात करें तो साल 2014 में जहां इनकी कुल लंबाई महज 93 किलोमीटर थी, वहीं अब यह बढ़कर 3,052 किलोमीटर तक पहुंच गई है. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह नेटवर्क देश की ग्रोथ स्टोरी को नई दिशा देगा.
हाईवे निवेश और जीडीपी का सीधा कनेक्शन
गडकरी ने आईआईएम बेंगलुरु (IIM Bengaluru) की एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि सड़क और हाईवे पर खर्च किया गया हर 1 रुपया देश की जीडीपी में औसतन 3.2 रुपये की बढ़ोतरी करता है. बेहतर सड़कें माल ढुलाई की लागत घटाती हैं, समय बचाती हैं और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाती हैं. यही कारण है कि सरकार सड़क निर्माण को आर्थिक सुधार के बड़े टूल के रूप में देख रही है.
सामाजिक असर भी उतना ही मजबूत
सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी बेहतर सड़क नेटवर्क का असर साफ नजर आ रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से स्कूल तक पहुंचने का समय औसतन 16 प्रतिशत घटा है, अस्पताल तक पहुंचने में 9 प्रतिशत की कमी आई है और फैक्ट्रियों से सप्लायर तक पहुंचने का समय भी करीब 9 प्रतिशत कम हुआ है. इसका सीधा फायदा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मौके बढ़ने के रूप में सामने आया है.
रोजगार का बड़ा स्रोत बनी सड़कें
आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) की रिपोर्ट के अनुसार, एक किलोमीटर लेन सड़क निर्माण से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होता है. पिछले पांच वर्षों में देश में करीब 57 हजार किलोमीटर हाईवे बनाए गए हैं, जिससे हर साल लगभग 33 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजन हुआ है. सरकार का कहना है कि सड़क क्षेत्र आने वाले समय में भी रोजगार का बड़ा इंजन बना रहेगा.
आगे का रोडमैप: 2033 तक बड़ा लक्ष्य
सरकार ने एक्सप्रेसवे नेटवर्क को लेकर लंबी अवधि की स्पष्ट योजना बनाई है. लक्ष्य है कि साल 2029 तक देश में 18,000 किलोमीटर नए एक्सप्रेसवे तैयार किए जाएं. वहीं 2033 तक यह आंकड़ा 26,000 किलोमीटर तक पहुंचाने का विजन रखा गया है. इसके साथ ही बड़े शहरों के लिए रिंग रोड, बाईपास और बंदरगाहों को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ने का काम भी तेज गति से चल रहा है.
पुरानी गाड़ियों की स्क्रैपिंग से सड़क सुरक्षा को मजबूती
एक्सप्रेसवे विस्तार के साथ सरकार सड़क सुरक्षा और पर्यावरण पर भी फोकस बनाए हुए है. नितिन गडकरी ने बताया कि वाहन स्क्रैपिंग नीति के तहत 30 जनवरी 2026 तक देशभर में 4,30,306 पुरानी और जर्जर गाड़ियों को स्क्रैप किया जा चुका है. वर्तमान में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 129 रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी काम कर रही हैं. पुरानी गाड़ियों को हटाने से प्रदूषण घटेगा, ईंधन की बचत होगी और तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों का जोखिम भी कम होगा.
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