सड़क परिहवन मंत्रालय के अनुसार पिछले 5 सालों में 57,125 किमी नेशलन हाईवे बनाए गए. वहीं सरकार ने आगे का भी लक्ष्य तय कर दिया है. जिसके अनुसार 2028-29 तक 18,000 किमी एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार किए जांएगे. 2032-33 तक 26,000 किमी का और काम शुरू होगा. इस तरह अगल तीन सालों में 18000 किमी. के एक्सप्रेसवे और हाई स्पीड कॉरिडोर और बनेंगे. इसके बनने के बाद लोग ट्रेन या फ्लाइट के बजाए अपनी गाड़ी से हाईवे या एक्सप्रेसवे से जाना पसंद करेंगे. इस तरह लोगों के पास सड़क मार्ग का विकल्प मिल जाएगा. जिससे सफर और आसान हो जाएगा.
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक्सप्रेसवे और हाई स्पीड कॉरिडोर को लगातार मोनिटर कर रहे हैं. मौजूदा समय देश में नेशनल हाईवे की कुल लंबाई 1,46,572 किमी. है. यह आंकड़ा दिसंबर 2025 तक का है. वहीं 2014 में यह सिर्फ 91,287 किमी था.
पिछले 12 सालों में कितना बना एक्सप्रेसवे
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले 12 सालों में राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) को बहुत तेजी से बढ़ाया और बेहतर बनाया है. 2014 में देश में एनएच की कुल लंबाई 91,287 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर हो गई है. खास बात यह है कि 4 लेन और उससे ज्यादा चौड़े एरनएच अब 2.6 गुना बढ़ चुके हैं. 2014 में सिर्फ 18,371 किमी थे, अब 48,568 किमी हो गए हैं. एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर भी सिर्फ 93 किमी से बढ़कर 3,052 किमी हो गए हैं. पहले 30% एनएच सिर्फ 2 लेन से कम चौड़े थे, अब यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 9% रह गया है.
एक्सप्रेसवे से जीडीपी में बढ़ोत्तरी कैसे
आईआईएम बैंगलोर की एक स्टडी बताती है कि नेशनल हाईवे बनाने में हर 1 रुपये खर्च करने से जीडीपी में 3.2 रुपये की बढ़ोतरी होती है. फैक्टरियों से सप्लायर तक सामान पहुंचने का समय 9% कम हुआ है, ग्राहकों तक पहुंचने में 5% कम समय लगता है. स्कूल जाने में 17% और अस्पताल पहुंचने में 9% समय बचता है. मंडी तक पहुंचने का समय 7% कम हुआ है और मंडियों की संख्या 8% बढ़ी है.
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