‘एक्स’ यूजर निहाल गुप्ता ने एफएंड और की वजह से बर्बाद हुए अपने कजिन की स्टोरी सांझा की है. गुप्ता का कहना है कि यह कजिन परिवार का ‘सक्सेस किड’ था. टियर-1 कॉलेज से बी.टेक और फिर देश के टॉप संस्थान से MBA. 2013 में जब उसने ₹12 लाख के सालाना पैकेज पर करियर की शुरुआत की तो वह सफलता की एक जीती-जागती मिसाल बन चुका था. चंद सालों में ही उसने अपना घर खरीद लिया और माता-पिता को वह हर सुख-सुविधा दी जिसका उन्होंने सपना देखा था. सब कुछ किसी खूबसूरत सपने जैसा चल रहा था, जब तक कि उसकी जिंदगी में ‘ऑप्शन ट्रेडिंग’ की एंट्री नहीं हुई.
एफएंडओ ने बर्बाद की जिंदगी
कहते हैं कि जुआ और ट्रेडिंग में शुरुआती जीत सबसे खतरनाक होती है. इस होनहार युवा के साथ भी यही हुआ. शुरुआत के कुछ महीनों में ऑप्शन ट्रेडिंग से मोटा मुनाफा हुआ. स्क्रीन पर चमकते हरे निशान ने उस आत्मविश्वास को ‘ओवरकॉन्फिडेंस’ में बदल दिया जो उसने अपनी डिग्री और मेहनत से कमाया था. फिर शुरू हुआ बड़े ट्रेड्स का सिलसिला.
जैसे ही बाजार ने करवट ली, मुनाफे की जगह घाटे ने ले ली. लेकिन एक ‘जीनियस’ दिमाग हार मानने को तैयार नहीं था. उसने सोचा, “बस एक बार रिकवर करना है.” इसी एक बार की चाहत में उसने अपनी शानदार नौकरी छोड़ दी ताकि वह फुल-टाइम ट्रेडिंग कर सके. यह उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई.
जीनियस से कर्जवान तक
जब जेब से पैसा खत्म हुआ, तो सहारा लिया गया कर्जों का. पहले पर्सनल लोन, फिर होम लोन की लिमिट बढ़वाई गई और अंत में दोस्तों-रिश्तेदारों से उधारी. देखते ही देखते, 10 सालों के भीतर इस ‘सक्सेस किड’ ने F&O की वेदी पर ₹1 करोड़ से ज्यादा की अपनी गाढ़ी कमाई और संपत्ति स्वाहा कर दी.
आज वह 35 साल का है, अविवाहित है और माथे पर ₹70 लाख के कर्ज का कलंक लिए घूम रहा है. ₹17 लाख सालाना की नौकरी करने के बावजूद उसका दिन चैन से नहीं बीतता, क्योंकि उसे डर है कि अगर एक भी EMI मिस हुई, तो सिर से छत भी छिन जाएगी. वह मेधावी मस्तिष्क, जो कभी बड़ी कंपनियों की रणनीति बनाता था, आज बाजार के टर्मिनल्स पर अपनी किस्मत हार चुका है.
10 में से 9 गंवाते हैं पैसा
F&O सेगमेंट में ट्रेड करने वाले 10 में से 9 रिटेल निवेशकों को अंततः भारी नुकसान उठाना पड़ता है. लोग ‘टॉप’ और ‘बॉटम’ पकड़ने के चक्कर में अपनी पूरी पूंजी गंवा देते हैं. सोशल मीडिया पर जब निहाल गुप्ता की पोस्ट वायरल हुई तो कई ट्रेडर्स ने अपना दर्द बयां किया. इसी बढ़ती ‘सट्टेबाजी’ को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में कड़े कदम उठाए हैं. वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है. सरकार का तर्क है कि भारत में डेरिवेटिव ट्रेडिंग का वॉल्यूम देश की GDP से 500 गुना ज्यादा हो चुका है, जो एक गंभीर आर्थिक जोखिम है.
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