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How to Get Loan : अगर आपके पास सैलरी स्लिप नहीं है और फिर भी बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ और डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी. अक्सर सैलरी स्लिप के अभाव में बैंक लोन को अप्रूव नहीं करते, लेकिन अगर आप कुछ तैयारी के साथ अप्लाई करें तो निश्चित रूप से आपके लोन अप्रूवल के चांसेज बढ़ जाएंगे.
पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं.
बैंकिंग मामलों के एक्सपर्ट का कहना है कि बैंकों को इस बात से कोई मतलब नहीं होता है कि आपके पास सैलरी स्लिप जैसे डॉक्यूमेंट हैं या नहीं, उन्हें बस यह जानना होता है कि आपके खाते में रेगुलर पैसे आते हैं या नहीं. उन्हें बस यह समझ आना चाहिए कि आप रेगुलर अपनी ईएमआई चुकाने में सक्षम हैं. यही जानने के लिए बैंक कुछ डॉक्यूमेंट की डिमांड करते हैं और उन्हें सैलरी स्लिप की जगह आप कुछ और प्रूफ दे देते हैं तो भी आपका काम बखूबी हो जाएगा.
क्या है सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट
सैलरी स्लिप से भी ज्यादा जरूरी डॉक्यूमेंट होता है आपका बैंक स्टेटमेंट. अगर आपके पास सैलरी स्लिप नहीं है, तो सबसे पहले बैंक आपका स्टेटमेंट देखता है. बैंक यह देखना चाहता है कि पिछले 6 से 12 महीनों में आपके खाते में पैसे कैसे आए हैं. मान लीजिए आप एक फ्रीलांस डिजाइनर हैं और आपके क्लाइंट्स से हर महीने या दो महीने में पेमेंट आती है. भले ही रकम थोड़ी-बहुत बदलती हो, लेकिन यह पैटर्न बैंक को बताता है कि आपकी रेगुलर आमदनी है. अक्सर इतना ही लोन एलिजिबिलिटी की बातचीत शुरू करने के लिए काफी होता है. हालांकि, अगर आपके बैंक स्टेटमेंट में बहुत कम डिपॉजिट या सिर्फ इर्रेगुलर कैश एंट्रीज दिखती हैं, तो लोन अप्रूवल मुश्किल हो जाता है.
समस्या हल कर सकता है आईटीआर
कई उधार लेने वाले इस बात को कम आंकते हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न ऐसे मामलों में कितनी मददगार होती है. अगर आप नियमित रूप से रिटर्न फाइल कर रहे हैं, तो बैंक पिछले दो-तीन सालों में आपकी घोषित आमदनी देख सकता है. अगर आपकी रिटर्न में सालाना 10-12 लाख रुपये की आमदनी दिख रही है, तो बैंक के पास अब एक साफ-सुथरा रेफरेंस पॉइंट है. प्रैक्टिकली, यह दस्तावेज कई बार सैलरी स्लिप की जगह ले लेता है.
कारोबारियों को दिखाने होंगे और भी रिकॉर्ड
अगर आप छोटा व्यवसाय चलाते हैं, तो बैंक आपसे जीएसटी फाइलिंग, इनवॉइस या बेसिक फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स मांग सकता है. ये दस्तावेज दिखाते हैं कि आपका व्यवसाय कितनी आमदनी कर रहा है और क्या वह स्थिर है. डॉक्टर, कंसल्टेंट या आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स कभी-कभी क्लाइंट एग्रीमेंट या बिलिंग रिकॉर्ड देते हैं. ये किसी सैलरी स्लिप जैसे नहीं दिखते, लेकिन इनका मकसद वही होता है. जब इनकम प्रूफ कम होता है, तो सिक्योर्ड लोन चीजों को आसान बना सकता है. गोल्ड लोन या प्रॉपर्टी के बदले लोन मुख्य रूप से उस संपत्ति की वैल्यू पर निर्भर करता है, जिसे आप गिरवी रखते हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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