भारत में 12,000 हॉर्स पावर की क्षमता वाले रेल इंजन का प्रोडक्शन तेजी से हो रहा है. यही नहीं, पूरी दुनिया में पहली बार ब्रॉड गेज रेलवे लाइन पर केवल भारत ने ही WAG12 B नामक इस शक्तिशाली रेल इंजन को दौड़ाया है. इस दैत्याकारी रेल इंजन का उत्पादन मेक इन इंडिया के तहत मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री में भारतीय रेलवे और फ्रांस की अल्सटॉम ने मिलकर कर रही है. अब तक अब तक 550 इंजन बन चुके हैं. रेलवे ने ऐसे 800 इंजन बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
अब तक 550 इंजन हो चुके हैं तैयार.
अमेरिका का कितना पॉवरफुल है इंजन
अमेरिका का सबसे पावरफुल रेल इंजन रेल इंजन यूनियन पैसीफिक जीटीईएल (Gas Turbine-Electric Locomotive है. यह तीसरी जेनरेशन का इंजन है, जिसकी पावर आउटपुट 8,500 HP है. यह अमेरिका का अब तक का सबसे पावरफुल प्राइम मूवर वाला लोकोमोटिव है. इसे भारी फ्रेट के लिए डिज़ाइन किया गया था. हालांकि यह इंजन अब रिटायर्ड है. मौजूदा समय अमेरिका के मॉडर्न डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स जैसे जीई ईटी 44एसी सबसे पावरफुल है, जिकसी क्षमता 4,400 एचपी है. इस तरह यह इंजन भारी में चलने वाले इंजन से बहुत ही कम क्षमता वाला है.
जापान में कितना पॉवर फुल इंजन है
जापान का सबसे शक्तिशाली रेल इंजन जेआर फ्रेट क्लास ईएफ 200 है. इसकी क्षमता 8000 एचपी है. यह इलेक्ट्रिक फ्रेट लोकोमोटिव है, जो व्हील अरेंजमेंट के साथ हिताची द्वारा बनाया गया. यह नर्रो गेज का सबसे पावरफुल सिंगल-फ्रेम लोकोमोटिव था, लेकिन 2007 में रिटायर्ड हो गया. मौजूदा समय जापान के मॉडर्न लोकोमोटिव्स जैसे ईएच 200 की है, जिसकी क्षमता 6,000 एचपी की है. इस तरह अमेरिका और और जापान के पुराने पावरफुल इंजन ऐतिहासिक हो चुके हैं और अब इस्तेमाल नहीं होते. इस तरह मौजूदा समय की बात करें, तो भारत का इंजन दोनों देशों के मौजूदा लोकोमोटिव्स से दोगुना-तिगुना पावरफुल है.
भारत के इंजन की खासियत
ये रेल इंजन स्टेट ऑफ दि आर्ट आईजीबीटी आधारित, 3 फेज ड्राइव, नौ हजार किलोवाट के हैं. इनमें जीपीएस भी दिया गया है, जिसकी सहायता से इन्हें कहीं भी ट्रैक किया जा सकता है. यह इंजन 120 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ सकता है. इससे भारत में मालगाड़ियों की औसत गति और भार ले जाने की क्षमता बेहतर हो रही है. मधेपुरा में बनने वाले इंजन ट्विन बो-बो डिजाइन वाले हैं. ऊंचाई पर माल लेकर जाने की इसकी क्षमता गजब की है.
और क्या हैं फायदें
मास्टर लोको में किसी तरह की खराबी आने की परिस्थिति में स्लेव लोको के पावर से कार्य किया जा सकता है. लोड कम होने की दशा में दो में से एक इंजन को बंद करके भी काम चलाया जा सकता है. इसकी लंबाई 35 मीटर हैं. और इसमे 1000 लीटर हाई कंप्रेसर कैपेसिटी के दो एमआर टैंक लगाए गए हैं.
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