भारतीय रेलवे ने 2019 में सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदेभारत शुरू किया है, जो 180 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से डिजाइन की गयी है. यही वजह है कि 82 वंदेभारत ट्रेन देशभर में दौड़ रही हैं. इसके साथ स्लीपर वंदेभारत भी शुरू हो गयी है. रेलवे इससे एक कदम आगे वंदेभारत 4.0 बनाने जा रहा है.
क्या होगी स्पीड
वंदे भारत 4.0 नया बेंचमार्क सेट करेगी. यह डेडिकेटेड हाई-स्पीड कॉरिडोर पर 350 किमी/घंटा तक की स्पीड सपोर्ट करने की क्षमता रखेगी, हालांकि शुरुआत में ऑपरेशनल स्पीड 250 किमी/घंटा से शुरू होगी. वंदे भारत 4.0 का प्रोटोटाइप और लॉन्च 2027 में होने की उम्मीद है. यह ट्रेन भारत को हाई-स्पीड रेल में आगे ले जाएगी और स्वदेशी तकनीक की ताकत दिखाएगी. वंदे भारत 4.0 न सिर्फ तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा देगी.
देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन शुरू हो चुकी है
सबसे बड़ी खासियत
सबसे खासियत कवच 5.0 तकनीक का इस्तेमाल की गयी है. कवच 5.0 भारत का स्वदेशी रूप से विकसित अगली पीढ़ी का ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो ट्रेनों की सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा. यह सिस्टम टकराव से बचाव, स्पीड कंट्रोल और सिग्नल तोड़ने पर रोकेगा.
जापान-जर्मनी से एक कदम आगे कैसे
जापान-जर्मनी जैसे देशों को हाई स्पीड ट्रेन बनाने में दशकों लग गए, तब जाकर वहां पर 350 किमी. प्रति घंटे की स्पीड वाली ट्रेन आज दौड़ रही है, लेकिन भारतीय रेलवे ने पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदेभारत 2019 चलाई थी. और 2027 यानी कुल नौ सालों में हाई स्पीड ट्रेन बनाकर ट्रैक पर तैयार करके दौड़ा देगा.
जापान और भारत की ट्रेनों में फर्क
भले ही जापान की ट्रेन स्पीड में आगे है, लेकिन मैग्लेव के लिए अलग ट्रैक बनाना पड़ता है जो बहुत महंगा होता है और इसमें समय भी लगता है. वंदे भारत 4.0 की 250 किमी. ऑपरेशनल स्पीड (डिजाइन में 280 किमी. तक) पर मौजूदा भारतीय ट्रैक पर चलेगी. यानी इसके लिए नई लाइन बिछाने की जरूरत नहीं है. भारत जैसे घनी आबादी और पुराने नेटवर्क वाले देश में बेहतर रहेगी.
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