देश का ब्यूटी एंड पर्सनल केयर (बीपीसी) मार्केट करवट ले रहा है। जो सेक्टर अब तक घरेलू नुस्खों, सीमित खर्च और पारंपरिक दुकानों तक सिमटा था, वह 2030 तक 3.6 लाख करोड़ रुपए (40 अरब डॉलर) तक पहुंच सकता है। तब भारत दुनिया का चौथा बड़ा बीपीसी मार्केट होगा। अभी यह बाजार 2 लाख करोड़ रुपए (23 अरब डॉलर) का है और इस हिसाब से भारत पांचवें स्थान पर है। अमेरिका, चीन, जापान और ब्राजील भारत से आगे हैं। रेडसीर स्ट्रैटजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बीपीसी मार्केट सालाना 12% कम्पाउंडेड रेट (सीएजीआर) से बढ़ रहा है। इस हिसाब से भारत में बीपीसी बाजार बढ़ने की रफ्तार पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। इस तेज विस्तार की दौड़ में ऐसी कंपनियां आगे रहेंगी, जो हर ग्राहक की खास जरूरतों के हिसाब से (पर्सनलाइज्ड) प्रोडक्ट बाजार में लाएंगी। जेन जी पावर: ब्यूटी-पर्सनल केयर पर खर्च में 50% हिस्सा 29 साल तक के युवाओं का होगा
बीपीसी प्रोडक्ट्स पर खर्च के मामले में जेन अल्फा (0-15 साल) और जेन जी (14-29 साल) मिलेनियल्स (30-45 साल) को पीछे छोड़ देंगे। इससे 1.8 लाख करोड़ रुपए का उपभोक्ता समूह बनेगा। 2024 तक बीपीसी पर खर्च में इस एज ग्रुप की 32% हिस्सेदारी थी, जो 2030 तक 50% तक हो सकती है। जेन-जी और अल्फा पीढ़ी (1997 के बाद जन्मे) बीपीसी बाजार को नई रफ्तार देंगी। 2030 तक ये 1.52 अरब की आबादी का 53% होंगे, 50% बीपीसी पर खर्च करेंगे। बीपीसी बाजार में 50% हिस्सेदारी 2005 के बाद बने करीब 150 नए ब्रांड की होगी। ~100 करोड़ सालाना आय वाले बीपीसी ब्रांड 2030 तक दोगुने हो जाएंगे।
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