Inflation Projection : रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ा दिया है, जबकि खाने-पीने की चीजों के दाम नहीं बढ़ रहे. इस बार महंगाई पर सबसे ज्यादा असर कीमती धातुओं की कीमतों का दिख रहा है.
आरबीआई ने खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है.
आरबीआई गवर्नर ने कीमती धातुओं के मूल्य में बढ़ोतरी के मद्देनजर चालू वित्तवर्ष के लिए महंगाई अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर शुक्रवार को 2.1 फीसदी कर दिया है. अगले वित्तवर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए भी अनुमान ऊपर की ओर संशोधित किए गए हैं. केंद्रीय बैंक ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर क्रमशः 4 फीसदी और 4.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले आरबीआई ने दिसंबर में 2025-26 के लिए इसके 2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था. वहीं, 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई दर क्रमशः 3.9 फीसदी और 4 फीसदी रहने का अनुमान था.
क्यों बढ़ाया महंगाई दर का अनुमान
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित कुल मुद्रास्फीति नवंबर में 0.7 फीसदी और दिसंबर, 2025 में 1.3 फीसदी रही. खाद्य समूह पदार्थों में नरमी बनी रही जबकि ईंधन समूह में महंगाई नवंबर और दिसंबर में मध्यम स्तर पर रही. कीमती धातुओं के मूल्यों में तेजी के बावजूद मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर सीपीआई) भी नियंत्रण में रही. सोने के अलावा दिसंबर में मुख्य मुद्रास्फीति 2.6 फीसदी पर स्थिर रही. इसका मतलब है कि मेटल में बढ़ती कीमतों की वजह से ही आरबीआई को महंगाई दर का अनुमान बढ़ाना पड़ा है.
कीमती धातुओं का कितना योगदान
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि 2026-27 की पहली व दूसरी तिमाही के लिए संशोधित खुदरा महंगाई का अनुमान क्रमशः 4.0 फीसदी और 4.2 फीसदी बना हुआ है. यह अनुकूल होने के साथ ही महंगाई लक्ष्य के करीब है. उन्होंने कहा कि महंगाई के अनुमान को मामूली रूप से ऊपर की ओर संशोधन मुख्यत: कीमती धातुओं के मूल्यों में बढ़ोतरी के कारण किया गया. इनका योगदान करीब 0.60 फीसदी से 0.70 फीसदी है. अंतर्निहित मुद्रास्फीति अब भी निम्न स्तर पर बनी हुई है.
खाने-पीने की सप्लाई बेहतर बनी रहेगी
गवर्नर ने कहा कि निकट भविष्य का परिदृश्य बताता है कि खरीफ उत्पादन अच्छा रहने, खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार, अनुकूल रबी बुवाई एवं पर्याप्त जलाशय स्तर के चलते खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं. मल्होत्रा ने कहा कि कीमती धातुओं के मूल्यों से संभावित अस्थिरता को छोड़ दें तो मुख्य महंगाई दर सीमित दायरे में रहने के आसार हैं. भूराजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिकूल मौसम आदि महंगाई के बढ़ने को लेकर जोखिम उत्पन्न करते हैं. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2024) के 12 फरवरी को जारी होने के मद्देनजर आरबीआई समूचे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान अप्रैल, 2026 की नीति घोषणा में पेश करेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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