Last Updated:
Success Story: झारखंड के शशिकांत और मलय ने 10 बीघा जमीन पर सिंघम वैरायटी तरबूज की आधुनिक खेती कर 10-12 लाख मुनाफे की उम्मीद बनाई है. उनकी मेहनत से इलाके के किसान प्रेरित हो रहे हैं और खेती को रोजगार का मजबूत जरिया मान रहे हैं.
करते हैं खास वैरायटी की तरबूज की खेती
इन युवकों के नाम शशिकांत बिश्वासी और मलय गिरी हैं. दोनों बचपन के दोस्त हैं. पहले से ही खेती से जुड़े हुए थे. उन्होंने सोचा कि अगर आधुनिक तरीके से खेती की जाए तो इससे अच्छी कमाई भी हो सकती है. इसी सोच के साथ दोनों ने मिलकर इस साल बड़े स्तर पर तरबूज की खेती शुरू की. वो भी खास वैरायटी की. ये सिंघम वैरायटी की तरबूज की खेती करते हैं. इस फल का साइज 5-7 केजी का होता है.
सीजन में तीन ट्रक बिक्री की उम्मीद
दोनों दोस्तों ने पहले खेत को अच्छी तरह तैयार किया. इसके बाद उच्च गुणवत्ता वाले बीज लगाए. फसल अच्छी हो इसके लिए समय-समय पर सिंचाई, खाद और दवाइयों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. वे खुद ही खेत में जाकर फसल की देखभाल करते हैं. कभी सिंचाई करते नजर आते हैं तो कभी पौधों की निगरानी करते दिखते हैं. उनको उम्मीद है कि सीजन में तीन ट्रक उपज होगी.
70-90 दिनों में फसल तैयार, मुनाफा 10-12 लाख
तरबूज की खेती गर्मी के मौसम में काफी फायदेमंद मानी जाती है. आम तौर पर यह फसल करीब 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. गर्मियों में बाजार में तरबूज की मांग भी काफी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल जाता है. किसानों के अनुसार तरबूज की खेती में शुरुआत में थोड़ी मेहनत और खर्च जरूर लगता है. एक बीघा जमीन में खेती करने में लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक का खर्च आता है. लेकिन अगर फसल अच्छी होती है तो एक बीघा जमीन से 60 से 1 लाख से ज्यादा की कमाई भी हो सकती है.
समय-समय पर रखें ये ख्याल
हालांकि खेती में मौसम का जोखिम भी बना रहता है. ज्यादा बारिश, कीट या बीमारी से फसल को नुकसान हो सकता है. इसलिए किसानों को समय-समय पर फसल की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है. शशिकांत और मलय का कहना है कि अगर किसान सही योजना और मेहनत के साथ खेती करें तो खेती भी एक अच्छा व्यवसाय बन सकता है. उनका यह भी कहना है कि अगर कोई किसान तरबूज की खेती सीखना चाहता है तो वह उनके खेत पर आकर देख सकता है और जानकारी ले सकता है.
दोनों बने मिसाल
आज इन दोनों दोस्तों की मेहनत पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है. कई किसान और युवा इनके खेत पर आकर खेती के तरीके देख रहे हैं. लोगों का मानना है कि अगर युवा खेती की ओर लौटें और नई तकनीक अपनाएं तो खेती भी रोजगार और सम्मान का मजबूत जरिया बन सकती है.
About the Author
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.