इस रैंकिंग का मतलब यह है कि अब भारतीय पासपोर्ट धारक 55 देशों में बिना वीजा, वीजा-ऑन-अराइवल या ई-ट्रैवल अथॉरिटी (ETA) के साथ यात्रा कर सकते हैं. यह पिछले साल के मुकाबले बेहतर स्थिति मानी जा रही है।
किन देशों में आसान है भारतीयों की यात्रा?
भारतीय नागरिक दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, कैरिबियन और कुछ द्वीपीय देशों में बिना वीजा या आसान प्रक्रिया के साथ जा सकते हैं. हालांकि, यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और पूर्वी एशिया के कई देशों के लिए अभी भी पहले से वीजा लेना जरूरी है.
टॉप में कौन?
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की लिस्ट में सिंगापुर पहले स्थान पर रहा है, जिसके पासपोर्ट से 192 देशों में बिना वीजा यात्रा संभव है. इसके बाद जापान और दक्षिण कोरिया हैं, जिनके नागरिक करीब 188 देशों में बिना वीजा जा सकते हैं.
यूरोपीय देशों का दबदबा
इस रैंकिंग के टॉप 10 में ज्यादातर यूरोपीय देशों के पासपोर्ट शामिल हैं. इन देशों के नागरिकों को 180 से ज्यादा देशों में यात्रा की आजादी मिलती है. डेनमार्क, लक्जमबर्ग, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला है.
सबसे कमजोर पासपोर्ट
सूची में अफगानिस्तान का पासपोर्ट सबसे नीचे रहा है. वहां के नागरिक केवल 24 देशों में ही यात्रा कर सकते हैं.
अमेरिका और यूके की स्थिति
अमेरिका एक बार फिर टॉप-10 में शामिल हुआ है, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के पासपोर्ट की ताकत में पिछले साल की तुलना में गिरावट भी दर्ज की गई है.
UAE बना सबसे बड़ी सफलता की कहानी
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पिछले 20 सालों में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला देश रहा है. साल 2006 से अब तक यूएई ने 149 नए देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा जोड़ी है और अब वह पांचवें स्थान पर पहुंच गया है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
हेनले एंड पार्टनर्स के चेयरमैन डॉ. क्रिश्चियन एच. केलिन के मुताबिक, बीते 20 वर्षों में यात्रा की आजादी बढ़ी है, लेकिन इसका फायदा सभी देशों को बराबर नहीं मिला. आज के समय में पासपोर्ट की ताकत लोगों के अवसर, सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी को तय करती है.
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