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8वें वेतन आयोग को लेकर पेंशनर्स और केंद्रीय कर्मचारियों को लंबे समय से इंतजार है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि नॉन-सीजीएचएस क्षेत्रों में मिलने वाला फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस 1000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए. वर्तमान में सीजीएचएस सुविधा से बाहर रहने वाले कर्मचारियों को सिर्फ 1000 रुपये मिलते हैं, जो बढ़ते इलाज खर्च और महंगाई के बीच नाकाफी बताए जा रहे हैं.
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर है. कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि नॉन-सीजीएचएस इलाकों में फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को 1000 रुपये से बढ़ाकर 20000 रुपये प्रति महीना किया जाए. अभी जो लोग सीजीएचएस यानी सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के कवर में नहीं आते हैं, उन्हें सिर्फ 1000 रुपये मेडिकल मदद मिलती है.

यह मांग कर्मचारी यूनियनों और एनसी-जेसीएम के स्टाफ साइड ने की है. वे कहते हैं कि अब मेडिकल खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं. 1000 रुपये में अब इलाज करवाना मुश्किल हो गया है, खासकर गांवों या दूर-दराज के इलाकों में जहां सरकारी अस्पताल या सीजीएचएस की सुविधा नहीं है.

यह प्रस्ताव 8वें वेतन आयोग के लिए तैयार की जा रही मांगों का हिस्सा है. यूनियनों ने जनवरी पिछले साल से ही कई डिमांड्स सरकार को भेजी हैं. इनमें फिटमेंट फैक्टर 3.25 गुना करने, सालाना बढ़ोतरी 3 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी करने जैसी बातें भी शामिल हैं. फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाने की मांग भी इसी सूची में है.
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केंद्र सरकार के करीब एक करोड़ कर्मचारी और पेंशनर्स इससे फायदा उठा सकते हैं. खासकर रिटायर्ड लोग जो छोटे शहरों या गांवों में रहते हैं, उनके लिए यह बहुत राहत वाली बात होगी. अभी 1000 रुपये मिलते हैं लेकिन अब 20000 रुपये तक पहुंच जाए तो मेडिकल खर्च आसानी से संभल जाएंगे.

यह मांग इसलिए मजबूत हो रही है क्योंकि स्वास्थ्य महंगाई बहुत तेज है. पेंशनर्स को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ता है और वहां खर्च बहुत ज्यादा होता है. यूनियनों का कहना है कि पुराना अमाउंट अब बेकार हो चुका है. इसे रियलिस्टिक बनाना जरूरी है.

8वां वेतन आयोग अब काम शुरू कर चुका है. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इसकी अध्यक्ष हैं. आयोग को चंद्रलोक बिल्डिंग में ऑफिस मिल गया है। कर्मचारी संगठन अब एक यूनिफाइड मेमोरेंडम तैयार कर रहे हैं. फरवरी के आखिर में ड्राफ्टिंग कमिटी की मीटिंग हुई थी.

अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है. सरकार या आयोग ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है. लेकिन अगर यह मंजूर हो गया तो लाखों लोगों की जिंदगी आसान हो जाएगी। कर्मचारी संगठन लगातार इस पर जोर दे रहे हैं.

यह मांग स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग में उनकी ये बातें सुनी जाएंगी.
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