समस्तीपुर के भगवानपुर देसुआ गांव की महिला किसान मधु रीता ने पारंपरिक खेती से अलग राह चुनकर नई मिसाल पेश की है. जहां अधिकांश किसान गेहूं और धान जैसी फसलों पर निर्भर रहते हैं, वहीं उन्होंने चुकंदर की खेती शुरू कर अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की. एक एकड़ जमीन में उगाई गई इस फसल से उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है. शुरुआत में लोगों को संदेह था, लेकिन सही जानकारी, मेहनत और बाजार की समझ ने उनकी तस्वीर बदल दी. चुकंदर की बढ़ती मांग ने उनकी सफलता को नई पहचान दी है.
मधु रीता के अनुसार चुकंदर की फसल तैयार होने में करीब 4 से 5 महीने का समय लगता है. वह फिलहाल अपने घर के बगल की एक एकड़ जमीन में इसकी खेती कर रही हैं. उनका कहना है कि अगर बाजार भाव सही मिल जाए, तो एक सीजन में एक एकड़ से दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है. वह अपनी उपज सीधे व्यापारियों को बेच देती हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिल जाता है. खास बात यह है कि चुकंदर की खेती में बहुत अधिक खर्च या जटिल तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती. नियमित सिंचाई और समय पर देखभाल से अच्छी पैदावार मिलती है. मधु रीता बताती हैं कि यह फसल मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखने में मदद करती है और ज्यादा जोखिम वाली नहीं है, इसलिए छोटे किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं.
फल के साथ पत्ते भी फायदेमंद
चुकंदर की खासियत सिर्फ उसका फल नहीं, बल्कि उसके पत्ते भी हैं. मधु रीता बताती हैं कि चुकंदर के पत्ते पशुओं के लिए बेहद लाभकारी होते हैं. इसे खिलाने से पशुओं का दूध बढ़ता है और उनकी सेहत भी बेहतर रहती है. इस तरह एक ही फसल से दोहरा फायदा मिलता है, फल बेचकर नकद आमदनी और पत्तों से पशुपालन में लाभ.वह कहती हैं कि किसानों को नई फसलों के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए और बाजार की मांग के अनुसार खेती करनी चाहिए. मधु रीता की सफलता कहानी यह साबित करती है कि अगर सोच नई हो और मेहनत सच्ची हो, तो खेती भी बड़े मुनाफे का जरिया बन सकती है.
About the Author
with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.