वर्ष 2025 में तकनीकी प्रतिभा की कमी 44 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसके चलते कंपनियों को अच्छे कर्मचारियों के लिए ज्यादा वेतन देना पड़ा और औसत वेतन 2024 की तुलना में 18 प्रतिशत बढ़ गया.
एडेको इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में तकनीकी प्रतिभा की कमी 44 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसके चलते कंपनियों को अच्छे कर्मचारियों के लिए ज्यादा वेतन देना पड़ा और औसत वेतन 2024 की तुलना में 18 प्रतिशत बढ़ गया. इससे कंपनियों के बीच अच्छे कर्मचारियों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. रिपोर्ट में बताया गया कि आर्टिफिशियल एंटेलिजेंस (एआई), डेटा और साइबर सेक्योरिटी से जुड़ी नौकरियों की मांग 51 प्रतिशत बढ़ गई है. पहले इन क्षेत्रों को प्रयोग के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब ये कंपनियों की महत्वपूर्ण जरूरत बन चुके हैं.
प्रतिभा की कमी से वेतन में बढ़ोतरी
वर्ष 2025 में तकनीकी क्षेत्र ने ‘टैलेंट वॉर’ का सामना किया, जहां कुशल कर्मचारियों की कमी 44 प्रतिशत तक पहुंच गई. इसका सीधा असर वेतन संरचना पर पड़ा है. अच्छे कर्मचारियों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए कंपनियों ने औसत वेतन में 18 प्रतिशत (2024 की तुलना में) की बढ़ोतरी की है. विशेष रूप से मशीन लर्निंग इंजीनियर्स, डेटा इंजीनियर्स और फुल-स्टैक डेवलपर्स जैसे पदों के लिए कंपनियां किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. स्पेशलिस्ट कर्मचारियों के वेतन में भी औसतन 15 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है, जो इस क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है.
जीसीसी (GCC) और स्टार्टअप्स भर्ती के नए पावरहाउस
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का विस्तार तेजी से हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, जीसीसी में भर्तियों की दर 20 प्रतिशत बढ़ी है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर है. इसके अलावा, कैंपस प्लेसमेंट में भी 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस नई भर्ती प्रक्रिया में डीप-टेक, फिनटेक, हेल्थ-टेक और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) पर आधारित स्टार्टअप्स सबसे आगे रहे हैं. हालांकि निवेश के मोर्चे पर सावधानी बरती जा रही है, लेकिन एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्ट रणनीति रखने वाली कंपनियां अपनी डेटा टीमों का विस्तार करने से पीछे नहीं हट रही हैं.
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