एआई के असर को आप कैसे देखते हैं? क्या इससे भारत में व्हाइट कॉलर नौकरियां खासकर आईटी सेक्टर में खत्म हो सकती हैं?
आदित्य पुरी
एआई को लेकर बहुत ज्यादा हाइप है और उतनी ही ज्यादा नकारात्मकता भी. क्या कुछ नौकरियां जाएंगी? हां. क्या नई नौकरियां बनेंगी? हां. लेकिन यह कहना कि 60 प्रतिशत नौकरियां एआई ले लेगा और उतनी ही नौकरी चली जाएगी, ऐसा नहीं होता. पूरी तरह से इंसानों की जगह एआई नहीं लेगा.
एजेंटिक एआई आएगा, बदलाव होंगे, लेकिन इंसान कहीं नहीं जा रहा. यह इंसान और तकनीक का मिश्रण होगा. और यह सब रातों रात नहीं होगा. इसमें एक या दो दशक लग सकते हैं.
एन आर नारायण मूर्ति, क्या युवाओं को एआई से डरने की जरूरत है?
एन आर नारायण मूर्ति
मेरे अपने अनुभव में, जनरेटिव एआई का इस्तेमाल करने पर मैंने देखा है कि समझदार दिमाग इन तकनीकों से ज्यादा गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादकता हासिल करता है. युवाओं को घबराने की जरूरत नहीं है.
उन्हें इन तकनीकों का मास्टर बनना चाहिए. समझदारी, कड़ी मेहनत, अनुशासन और नई चीजें जल्दी सीखने की क्षमता के साथ अगर वे एआई का इस्तेमाल करेंगे तो उनका भविष्य सुरक्षित है. समझदार और मेहनती लोगों के लिए दुनिया खत्म नहीं होने वाली.
क्या एआई फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर को भी बदल देगा? जैसे कस्टमर क्वेरी, लेंडिंग और फ्रॉड डिटेक्शन में?
आदित्य पुरी
बैंकिंग में एआई मार्केटिंग का तरीका बदलेगा, क्रेडिट असेसमेंट बदलेगा, फ्रॉड डिटेक्शन बदलेगा और कई प्रोसेस बदलेंगे. कुछ बदलाव अभी शुरू भी हो चुके हैं. लेकिन यह बदलाव धीरे धीरे आएगा. यह कोई एक दिन में होने वाली क्रांति नहीं है.
बैंकिंग सेक्टर में डिपॉजिट ग्रोथ को लेकर चिंता जताई जा रही है. आप इसे कैसे देखते हैं?
आदित्य पुरी
भारत में बैंकिंग अब भी अंडरपेनिट्रेटेड है. सेमी अर्बन और ग्रामीण इलाकों में बड़ी मात्रा में डिपॉजिट मौजूद हैं. यह कहना कि पैसा बैंक से निकलकर पूरी तरह इक्विटी और म्यूचुअल फंड में चला गया है, सही नहीं है.
भारत की केवल लगभग 6 प्रतिशत आबादी शेयर बाजार में निवेश करती है. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि बैंकों में पैसे की भारी कमी हो गई है. अगर जरूरत पड़ी तो रिजर्व रिक्वायरमेंट जैसे नियमों पर दोबारा विचार किया जा सकता है. यह ग्रोथ की तलाश में एक बड़ा बाजार है.
मूर्ति जी, आपने आदित्य पुरी को आजादी के बाद भारत का बेहतरीन उद्यमी कहा. उन्हें खास क्या बनाता है?
एन आर नारायण मूर्ति
उनकी दृढ़ता, अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की क्षमता और भारतीय संदर्भ में दबावों के बावजूद लचीला न होने की ताकत उन्हें अलग बनाती है. यही गुण उन्हें बेहतरीन बैंकर और उद्यमी बनाते हैं.
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