बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड की स्कीम्स को लेकर प्रावधान कड़े कर दिए हैं. सेबी ने कहा है कि अब फंड मैनेजर्स स्कीम की प्रकृति के हिसाब से ही उसका नाम रखेंगे और कोई भी स्कीम एक-दूसरे को ओवरलैप नहीं करेगी. यह सख्ती म्यूचुअल फंड योजनाओं के नाम और उसकी कैटेगरी के भ्रम को खत्म करने के लिए की गई है.
सेबी ने म्यूचुअल फंड के नियमों को लेकर बड़ा बदलाव किया है.
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड कैटेगरी की संख्या 36 से बढ़ाकर 40 कर दी है. इसमें 13 इक्विटी, 17 डेट, 7 हाइब्रिड, 2 ‘अन्य’ कैटेगरी (इंडेक्स फंड्स, ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स) और 1 लाइफ साइकिल कैटेगरी शामिल है. SEBI ने पोर्टफोलियो ओवरलैप पर भी सख्त सीमा तय की है, खासकर सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स के लिए, साथ ही वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं.
एसेट मैनेजर्स के लिए क्या होगा नया
एसेट मैनेजर्स अब भी वैल्यू और कॉन्ट्रा दोनों स्कीम्स चला सकते हैं, लेकिन दोनों पोर्टफोलियो में ओवरलैप 50% से ज्यादा नहीं हो सकता. थीमैटिक इक्विटी स्कीम्स के लिए SEBI ने कहा है कि किसी भी स्कीम का पोर्टफोलियो 50% से ज्यादा अन्य थीमैटिक स्कीम्स या अन्य इक्विटी कैटेगरी (लार्ज-कैप को छोड़कर) से ओवरलैप नहीं होना चाहिए. नियामक अब सिर्फ लेबल की निगरानी नहीं कर रहा, बल्कि पोर्टफोलियो पर भी नजर रख रहा है, जिससे स्कीम्स अपने नाम के मुताबिक ही निवेश करें.
हर तिमाही मापी जाएगी स्कीम की ओवरलैपिंग
SEBI ने ओवरलैप मापने की प्रक्रिया भी स्टैंडर्ड कर दी है. अब यह तिमाही आधार पर मापा जाएगा, जिसमें उस अवधि के डेली पोर्टफोलियो ओवरलैप का औसत लिया जाएगा. यह लेबलिंग से क्लियर डिमार्केशन की ओर बड़ा बदलाव है और इससे एक ही एएमसी के भीतर डुप्लीकेट फंड्स कम होंगे. अब एक ही पोर्टफोलियो के साथ अलग-अलग नाम से कई स्कीम्स चलाना मुश्किल होगा.
सोच-समझकर रखना होगा स्कीम का नाम
नियामक ने स्कीम के नामकरण के नियम भी सख्त किए हैं. अब स्कीम का नाम उसकी कैटेगरी से मेल खाना चाहिए. एसेट मैनेजर्स को अपनी वेबसाइट पर हर महीने कैटेगरी के हिसाब से ओवरलैप की जानकारी देनी होगी. इक्विटी बनाम इक्विटी, डेट बनाम डेट और हाइब्रिड बनाम हाइब्रिड. SEBI ने सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया है. मौजूदा स्कीम्स को सब्सक्रिप्शन बंद करने और SEBI की मंजूरी से किसी समान स्कीम में मर्ज करने का निर्देश दिया गया है. नए नियमों के तहत डिविडेंड यील्ड, वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स के लिए कम से कम 80% इक्विटी निवेश अनिवार्य किया गया है. साथ ही लाइफ साइकिल फंड्स और सेक्टोरल डेट फंड्स जैसी नई संरचनाएं भी पेश की गई हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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