अकासा एयर (Akasa Air) की मुंबई से अहमदाबाद जा रही फ्लाइट क्यूपी 1781 (QP 1781) दो बार तेज हवा की वजह से रनवे पर लैंड नहीं कर सकी. पायलट ने सेफ्टी प्रोटोकॉल फॉलो करते हुए गो अराउंड किया और बाद में फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट कर रिफ्यूलिंग कराई. तीसरी कोशिश में विमान अहमदाबाद में सुरक्षित उतरा और सभी यात्री व क्रू पूरी तरह सुरक्षित रहे.
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि खराब मौसम में पायलट का फैसला यात्रियों की सुरक्षा के लिए कितना अहम होता है. विमान में मौजूद सभी यात्री और क्रू पूरी तरह सुरक्षित रहे, लेकिन करीब पांच घंटे तक चला यह पूरा ऑपरेशन यात्रियों के लिए तनाव भरा अनुभव बन गया.
क्या है पूरा मामला
यह फ्लाइट अकासा एयर की क्यूपी 1781 (QP 1781) थी जो मुंबई से अहमदाबाद के लिए रवाना हुई थी. शेड्यूल के मुताबिक सुबह उड़ान भरने के बाद विमान को करीब दस बजे अहमदाबाद उतरना था. लेकिन एयरपोर्ट के आसपास तेज हवा और बदलते विंड पैटर्न की वजह से लैंडिंग के समय अनस्टेबल अप्रोच की स्थिति बन गई. पायलट ने पहली कोशिश में ही रनवे पर उतरने की बजाय गो अराउंड करने का फैसला लिया और विमान को दोबारा ऊपर ले जाया गया.
दूसरी कोशिश में भी हालात नहीं सुधरे. एयरपोर्ट पर दूसरे विमानों की आवाजाही की वजह से फ्लाइट को कुछ देर हवा में सर्कल करना पड़ा. लगातार दो असफल लैंडिंग कोशिशों के बाद पायलट ने रिस्क न लेते हुए विमान को जयपुर एयरपोर्ट डायवर्ट करने का निर्णय लिया. यह एविएशन सेफ्टी नियमों के मुताबिक स्टैंडर्ड प्रक्रिया मानी जाती है.
जयपुर में रिफ्यूलिंग और तीसरी कोशिश
जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद विमान में फ्यूल भरा गया ताकि आगे की उड़ान सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके. कुछ देर बाद फ्लाइट ने फिर अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी. इस बार मौसम की स्थिति बेहतर रही और दोपहर करीब एक तीस मिनट पर विमान ने अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कर ली. इस पूरी प्रक्रिया में किसी यात्री या क्रू को कोई चोट नहीं आई.
यात्रियों ने सोशल मीडिया पर देरी और घबराहट की बात जरूर कही, लेकिन सभी ने यह भी माना कि पायलट ने सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया. एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे डायवर्जन खराब मौसम में आम प्रक्रिया है और यही यात्रियों की जान बचाने का सबसे भरोसेमंद तरीका होता है.
क्या कोई तकनीकी गड़बड़ी थी
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विमान में किसी तरह की तकनीकी खराबी की पुष्टि नहीं हुई है. मुख्य कारण अहमदाबाद एयरपोर्ट पर तेज हवा और अनस्टेबल लैंडिंग कंडीशन बताई जा रही है. एयरलाइन की तरफ से विस्तृत आधिकारिक बयान आना बाकी है, जबकि डीजीसीए (DGCA) स्तर पर घटना की समीक्षा की जा सकती है ताकि भविष्य में ऐसे हालात में ऑपरेशन को और बेहतर बनाया जा सके.
सेफ्टी प्रोटोकॉल की जीत
इस घटना का सबसे अहम पहलू यह रहा कि पायलट ने समय रहते सही फैसला लिया. अगर लगातार कोशिशों के बाद भी लैंडिंग का रिस्क लिया जाता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. जयपुर डायवर्जन और रिफ्यूलिंग के बाद तीसरी कोशिश में सुरक्षित लैंडिंग यह साबित करती है कि इंडियन एविएशन सिस्टम में सेफ्टी को पहली प्राथमिकता दी जाती है. यात्रियों के लिए भले यह अनुभव लंबा और थका देने वाला रहा हो, लेकिन अंत में सभी सुरक्षित घर पहुंचे यही सबसे बड़ी राहत रही.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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