फिलहाल एसबीएमसी भारत में ब्रांच मॉडल के जरिए काम कर रहा है. बैंक की 4 ब्रांच नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में हैं. आरबीआई ने साफ किया है कि एसबीएमसी को यह मंजूरी अपनी मौजूदा भारतीय ब्रांच को सब्सिडियरी में बदलने के लिए दी गई है. भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, अगर एसबीएमसी सभी जरूरी शर्तों को पूरा करता है, तो उसे बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(1) के तहत भारत में सब्सिडियरी बैंक के रूप में काम शुरू करने का लाइसेंस दिया जाएगा.
सब्सिडियरी बनने से क्या फायदा होगा?
भारत में एक अलग कानूनी इकाई के तौर पर काम करने से सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन को ज्यादा आजादी मिलेगी. बैंक बिना ज्यादा रोक-टोक के नई शाखाएं खोल सकेगा. भारतीय बैंकों जैसी सुविधाएं मिलेंगी. भारत में लगाई गई पूंजी अलग रहेगी.
Yes Bank का सबसे बड़ा शेयर होल्डर है SMBC
पिछले साल एसबीएमसी ने यस बैंक में 24.22 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी. इसके साथ ही वह यस बैंक का सबसे बड़ा शेयर होल्डर बन गया. हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक अब भी 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ एक अहम निवेशक बना हुआ है. यस बैंक ने कहा है कि वह एसबीएमसी की ग्लोबल ताकत का इस्तेमाल कर भारत-जापान के बीच व्यापार, निवेश, कॉरपोरेट बैंकिंग और क्रॉस-बॉर्डर सर्विसेज को और मजबूत करेगा.
यस बैंक में एसबीआई समेत कई बैंका का निवेश
गौरतलब है कि मार्च 2020 में, कोविड से ठीक पहले, RBI और सरकार की अगुवाई में यस बैंक को बचाने के लिए एसबीआई समेत कई बैंकों ने निवेश किया था. उस वक्त एसबीआई के पास करीब 24 फीसदी हिस्सेदारी थी, जो अब घटकर 10 फीसदी से कुछ ज्यादा रह गई है.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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