यह 100 साल का बॉन्ड करीब 1 अरब पाउंड का है और इसे निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. खासकर पेंशन फंड और इंश्योरेंस कंपनियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि उन्हें लंबे समय के निवेश की जरूरत होती है.
क्यों उठ रही हैं चिंताएं?
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह कदम दिखाता है कि टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर बनाने के लिए तेजी से कर्ज ले रही हैं. इस साल अल्फाबेट का कैपेक्स (कैपिटल खर्च) 185 अरब डॉलर तक पहुंचने वाला है.
एक्सपर्ट बिल ब्लेनका कहना है कि AI के नाम पर कर्ज लेने की होड़ कुछ हद तक ओवरहीट” मार्केट का संकेत देती है. उनका मानना है कि जब 100 साल का कॉरपोरेट बॉन्ड आसानी से बिक जाए, तो यह बाजार में ज्यादा उत्साह का संकेत हो सकता है.
दूसरी कंपनियां भी दौड़ में
AI इंफ्रास्ट्रक्चर की इस रेस में Amazon, Microsoft और Oracle जैसी कंपनियां भी भारी निवेश कर रही हैं. अनुमान है कि आने वाले 5 साल में टेक कंपनियां करीब 3 ट्रिलियन डॉलर तक का कर्ज उठा सकती हैं.
क्या है रिस्क?
100 साल का बॉन्ड खरीदने वाले निवेशक यह दांव लगा रहे हैं कि Alphabet आने वाले 100 साल तक मजबूत बनी रहेगी और ब्याज चुकाती रहेगी. लेकिन टेक सेक्टर बहुत तेजी से बदलता है. नई टेक्नोलॉजी आती हैं, कंपनियां आगे-पीछे होती रहती हैं. ऐसे में इतना लंबा निवेश कुछ लोगों को रिस्क भरा लग रहा है. कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि अभी क्रेडिट मार्केट में ब्याज दरों का अंतर (स्प्रेड) काफी कम है और टेक शेयर पहले से रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं. ऐसे माहौल में 100 साल का कर्ज लेना और देना अनटेस्टेड वाटर्स यानी अनजाना रिस्क हो सकता है.
क्यों किया गया यह कदम?
जानकारों का मानना है कि Alphabet डॉलर बाजार पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहती। इसलिए उसने पाउंड और स्विस फ्रैंक में भी बॉन्ड जारी किए हैं, ताकि फंडिंग के स्रोत विविध (diversify) किए जा सकें।
IBM ने 1996 में 100 साल मैच्योरिटी वाले बॉन्ड इश्यू किए थे
इससे पहले अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी IBM ने 1996 में 100 साल के बॉन्ड्स इश्यू किए थे। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, इस इश्यू से जुड़े बैंकर्स का कहना है कि पौंड में बॉन्ड्स इश्यू के जरिए अल्फाबेट लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के एक नए पूल से पैसे जुटा सकेगी. वह इस इश्यू के जरिए अमेरिकी मार्केट के मुकाबले कम इंटरेस्ट रेट पर पैसा जुटा सकेगी.
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