NCLT ने अंबुजा सीमेंट्स (Ambuja Cements) और सांघी इंडस्ट्रीज (Sanghi Industries) के मर्जर स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिससे अडानी ग्रुप (Adani Group) की सीमेंट रणनीति को मजबूती मिलेगी. सांघी इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को हर एक शेयर पर अंबुजा सीमेंट्स के 0.372 शेयर मिलेंगे और यह मर्जर ऑपरेशनल सिनर्जी और लागत दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा. इस कदम से पश्चिमी भारत में अंबुजा की बाजार स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है.
मर्जर के तहत सांघी इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को हर एक शेयर के बदले अंबुजा सीमेंट्स के 0.372 इक्विटी शेयर मिलेंगे. यह पूरी तरह शेयर स्वैप डील है और इसमें किसी तरह का कैश भुगतान शामिल नहीं है. इस विलय के बाद सांघी के शेयरधारक सीधे अंबुजा सीमेंट्स के शेयरधारक बन जाएंगे और अंबुजा नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. अंबुजा सीमेंट्स (Ambuja Cements) ने दिसंबर 2024 में मर्जर रेश्यो की जानकारी दी थी. कंपनी ने कहा था कि मर्जर के बाद वह सांघी इंडस्ट्रीज (Sanghi Industries) के शेयरधारकों को हर 100 शेयर के बदले अंबुजा सीमेंट्स के 12 इक्विटी शेयर जारी करेगी, जिनका फेस वैल्यू 2 रुपये प्रति शेयर होगा, जबकि सांघी इंडस्ट्रीज के शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये है. इस शेयर स्वैप के जरिए सांघी इंडस्ट्रीज के योग्य शेयरधारक सीधे अंबुजा सीमेंट्स के शेयरधारक बन जाएंगे.
बयान में क्या कहा गया?
कंपनियों की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार इस मर्जर का मकसद ऑपरेशनल सिनर्जी बढ़ाना, लागत कम करना और संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है. इससे पश्चिमी भारत में अंबुजा सीमेंट्स की उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है. गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख बाजारों में अंबुजा की पकड़ और मजबूत हो सकती है. सांघी इंडस्ट्रीज गुजरात स्थित सीमेंट कंपनी है और कच्छ क्षेत्र में इसकी बड़ी उत्पादन इकाई मौजूद है. कंपनी के पास चूना पत्थर के बड़े भंडार हैं, जिनका बेहतर उपयोग अंबुजा सीमेंट्स के तहत किया जा सकेगा. वहीं अंबुजा सीमेंट्स पहले से ही देश की प्रमुख सीमेंट कंपनियों में शामिल है और अडानी ग्रुप के अधिग्रहण के बाद यह तेजी से विस्तार कर रही है.
अडानी समूह की रणनीति
यह मर्जर अडानी ग्रुप की सीमेंट सेक्टर में एकीकरण रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इससे पहले अडानी ग्रुप ने अंबुजा और एसीसी (ACC) के बीच भी संरचनात्मक बदलाव और समेकन की प्रक्रिया पूरी की थी. भारतीय सीमेंट सेक्टर में बड़े खिलाड़ियों के बीच एकीकरण बढ़ रहा है और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की बढ़ती मांग के बीच कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं. NCLT की मंजूरी के साथ यह मर्जर कानूनी रूप से एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है और अब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास फाइलिंग के बाद यह पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा. इस कदम से अडानी ग्रुप की सीमेंट कारोबार में स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है और बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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