Tariff Refund : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से टैरिफ को अवैध करार दिए जाने के बाद कस्टम और सीमा सुरक्षा विभाग ने रिफंड की तैयारी शुरू कर दी है. विभाग की ओर से अदालत को दी गई जानकारी में बताया गया है कि एजेंसी एकमुश्त रिफंड के लिए नया सिस्टम विकसित कर रही है. इस सिस्टम के जरिये आयातकों को ज्यादा मुकदमेबाजी नहीं करनी पड़ेगी और उन्हें एक बार में ही सारा पैसा मिल जाएगा.
अमेरिका ने टैरिफ लौटाने के लिए नया सिस्टम विकसित किया है.
कस्टम और सीमा सुरक्षा के अधिकारी ब्रैंडन लॉर्ड ने अदालत में पेश किए एक दस्तावेज में बताया कि उनकी एजेंसी एक ऐसी प्रक्रिया विकसित कर रही है, जिससे दुनियाभर के आयातकों को उनकी ओर से चुकाए गए टैरिफ को वापस किया जा सकेगा. यह घोषणा उस समय आई जब सरकारी वकील एक संघीय व्यापार न्यायाधीश से मिले, ताकि लगभग 166 अरब डॉलर की टैरिफ राशि करीब 3,30,000 आयातकों को लौटाने के लिए एक व्यापक समझौता ढांचा तैयार किया जा सके.
आयातकों को ज्यादा डॉक्यूमेंट नहीं देने होंगे
लॉर्ड ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दाखिल अपने बयान में कहा है कि नई प्रक्रिया के तहत आयातकों को बहुत कम दस्तावेज जमा करने होंगे. सरकारी वकीलों ने जज रिचर्ड ईटन से भी मुलाकात शुरू कर दी है, जो उन करीब 2,000 मुकदमों की निगरानी कर रहे हैं, जिन्हें आयातकों ने दायर किया है. इनमें FedEx और L’Oréal जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, जो शुल्क की वापसी की मांग कर रही हैं. कोर्ट ने भी विभाग को अपना नया सिस्टम लागू करने का समय दिया है.
कैसे दिया जाएगा रिफंड
कस्टम और सीमा सुरक्षा विभाग के प्रस्तावित सिस्टम के तहत आयातक CBP के ऑटोमेटेड कमर्शियल एनवायरनमेंट (ACE) सिस्टम के जरिये एक घोषणा पत्र जमा करेंगे, जिसमें वे बताएंगे कि उन्होंने कितनी टैरिफ दी है. एजेंसी इन दावों की जांच करेगी और फिर ब्याज सहित रिफंड जारी करेगी. हर आयातक को अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट से एक ही भुगतान मिलेगा, चाहे उसने कितनी भी अलग-अलग खेपें मंगाई हों. यह प्रक्रिया इसलिए बनाई गई है, ताकि कंपनियों को रिफंड पाने के लिए अलग-अलग मुकदमे दायर न करने पड़ें.
मुकदमेबाजी की जरूरत नहीं होगी
लॉर्ड ने अदालती दस्तावेज में कहा कि कस्टम एजेंसी को उम्मीद है कि आयातक ACE सिस्टम के जरिए टैरिफ भुगतान का ब्योरा देंगे, जिसे जांचने के बाद ब्याज सहित रिफंड प्रोसेस किया जाएगा. रिफंड पाने के लिए आयातकों को मुकदमा करने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, लॉर्ड ने यह भी कहा कि एजेंसी मौजूदा सिस्टम के जरिये जज रिचर्ड ईटन के पहले के आदेश का तुरंत पालन नहीं कर सकती. मौजूदा प्रशासनिक प्रक्रिया और तकनीक इतने बड़े काम के लिए उपयुक्त नहीं है. मौजूदा सिस्टम के तहत रिफंड मैन्युअली प्रोसेस करने में 40 लाख घंटे से ज्यादा का श्रम लगेगा, क्योंकि हर खेप के कागजात को अलग-अलग जांचना पड़ेगा.
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