भारतीय विमानन उद्योग के लिए ये साल चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. रेटिंग एजेंसी ICRA ने 170-180 अरब रुपये तक के शुद्ध घाटे का अनुमान जताया है. घरेलू यात्रा में सुस्ती और बढ़ती लागत ने एयरलाइंस पर दबाव बढ़ाया है. हालांकि 2026-27 में हालात सुधरने और घाटा कम होने की उम्मीद जताई गई है.
घरेलू यात्री वृद्धि धीमी, ईंधन-डॉलर दबाव से एयरलाइंस की हालत कमजोर. (Image:AI)
घरेलू यात्रा पर असर, कई वजहों से मांग रही कमजोर
मौजूदा वित्त वर्ष में घरेलू हवाई यात्रा की रफ्तार उम्मीद से कम रही है. सीमा पार तनाव, खराब मौसम, जून 2025 में विमान हादसे के बाद यात्रियों की हिचकिचाहट और ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के कारण बिजनेस ट्रैवल पर असर पड़ा. इसके अलावा दिसंबर 2025 में इंडिगो (IndiGo) में परिचालन व्यवधान से भी उड़ानें रद्द हुईं और रिफंड का बोझ बढ़ा. पहले जहां 2025-26 में 4-6 फीसदी वृद्धि का अनुमान था, उसे घटाकर 0-3 फीसदी कर दिया गया. हालांकि 2026-27 में घरेलू यात्री संख्या 6-8 फीसदी बढ़कर 17.5 से 17.9 करोड़ तक पहुंच सकती है.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से मिलेगी राहत
घरेलू बाजार की सुस्ती के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्री ट्रैफिक अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है. कम बेस इफेक्ट, ई-वीजा और वीजा-ऑन-अराइवल सुविधाओं का विस्तार तथा पर्यटन स्थलों के विकास पर सरकार का जोर विदेशी यात्रा को बढ़ावा दे रहा है. ICRA के अनुसार 2025-26 में अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक 7-9 फीसदी और 2026-27 में 8-10 फीसदी तक बढ़ सकता है. इससे एयरलाइंस को रेवेन्यू में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
ईंधन और डॉलर का दबाव बढ़ा रहा मुश्किलें
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें और रुपये-डॉलर की चाल एयरलाइंस की कमाई पर सीधा असर डालती हैं. ईंधन खर्च कुल परिचालन लागत का 30-40 फीसदी तक होता है. चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 3.2 फीसदी कमजोर हुआ. भले ही यह गिरावट बहुत बड़ी न लगे, लेकिन लीज रेंटल, इंजन मेंटेनेंस और कर्ज भुगतान जैसी डॉलर आधारित लागतों पर इसका असर पड़ता है. यही वजह है कि उद्योग की ब्याज कवरेज दर 2024-25 के 1.8 गुना से घटकर 2025-26 में 0.7-0.9 गुना तक आंकी गई है.
नए विमानों की डिलीवरी से बदलेगी तस्वीर
2025 में उद्योग ने करीब 4 फीसदी क्षमता बढ़ाई और दिसंबर 2025 तक विमानों की कुल संख्या 865 रही. आने वाले वर्षों में 1,700 से अधिक विमानों की डिलीवरी लंबित है, जो अगले 10 साल में चरणबद्ध तरीके से मिलेगी. इनमें से कई ऑर्डर पुराने विमानों की जगह ईंधन-कुशल नए विमान लाने के लिए हैं. ICRA का मानना है कि परिचालन सामान्य होने और यात्री वृद्धि लौटने से 2026-27 में घाटा घटेगा और उद्योग की वित्तीय स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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