Adani Power vs Bangladesh : भारतीय कंपनी अडानी पॉवर लंबे समय से बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई कर रही है. अब बांग्लादेश ने कंपनी पर ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप लगाया है और उसके खिलाफ सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत में लंदन की लॉ फर्म को खड़ा किया है.
खबर है कि बांग्लादेश ने अपने सरकारी पॉवर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) के लिए अडानी पॉवर लिमिटेड के साथ कोयले की कीमत और बिजली टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद में मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए एक ब्रिटिश लॉ फर्म को नियुक्त किया है. BPDB के अधिकारियों ने बताया कि लंदन स्थित 3VP नामक प्रमुख लॉ फर्म को सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है. यह फर्म वाणिज्यिक और वित्तीय मुकदमों में विशेषज्ञता रखती है.
लंबे समय से सलाह दे रही है फर्म
बांग्लादेश के बिजनेस स्टैंडर्ड (TBS) अखबार के मुताबिक, किंग्स काउंसिल फरहाज खान के नेतृत्व वाली 3VP चैंबर्स पिछले कई महीनों से अडानी डील पर एक राष्ट्रीय समीक्षा समिति को सलाह दे रही थी. यह घटनाक्रम उस समिति की अंतिम रिपोर्ट सौंपने के पांच दिन के भीतर ही सामने आया है, जिसमें अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के दौरान हुए बिजली क्षेत्र के समझौतों का विवरण दिया गया था. पॉवर डिवीजन के एक अधिकारी ने बताया कि हमने ब्रिटिश फर्म को इसलिए नियुक्त किया, क्योंकि अडानी पॉवर ने पिछले साल सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में मध्यस्थता शुरू की थी. अडानी पॉवर ने विवादित कोयला टैरिफ से जुड़े करीब 48.5 करोड़ डॉलर के बकाया का दावा किया है.
बांग्लादेश ने क्या लगाया आरोप
बांग्लादेश का कहना है कि अडानी पॉवर कोयले की कीमत बहुत ज्यादा वसूल रही है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ रही है. 5 अगस्त 2024 को हसीना सरकार के छात्र आंदोलन के चलते गिरने के बाद BPDB ने अडानी के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. राष्ट्रीय समीक्षा समिति ने गुरुवार को कहा कि उसके पास अडानी पॉवर लिमिटेड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए मजबूत सबूत हैं.
कोर्ट में सौंपेगी लेनदेन का सबूत
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के ऊर्जा सलाहकार फौजुल कबीर खान ने कहा कि अडानी पॉवर के अधिकारियों और बांग्लादेशी अधिकारियों के बीच पैसों का लेनदेन हुआ है और पैनल कानूनी प्रक्रिया शुरू होते ही ये सबूत अदालत में पेश करने के लिए तैयार है. अधिकारियों ने बताया कि ये सबूत आगे की जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) को सौंप दिए गए हैं. समीक्षा समिति ने पिछले साल नवंबर में अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें सलाहकार ने कहा था कि अगर यह साबित हो जाता है कि अडानी के साथ बिजली खरीद समझौता भ्रष्ट तरीकों से हुआ है तो मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार मौजूदा समझौता रद्द कर सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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