बिटकॉइन में आई यह हालिया गिरावट कोई ‘टेक्निकल चार्ट फेलियर’ नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लिक्विडिटी की कमी का परिणाम है. CryptoQuant के CEO की यंग जू (Ki Young Ju) के अनुसार, बाजार में बिकवाली का दबाव तो बना हुआ है, लेकिन नया पैसा (Fresh Capital) नहीं आ रहा है. जब तक बाजार में नया कैश फ्लो बना रहता है, कीमतें ऊपर की ओर भागती हैं. पिछले साल की तेजी इसी ‘न्यू मनी’ के दम पर थी. लेकिन अब निवेशक अब नई पूंजी लगाने से कतरा रहे हैं. तकनीकी भाषा में, जब मार्केट कैप गिर रहा हो और नई पूंजी का आना बंद हो जाए, तो इसे किसी भी सूरत में ‘बुल मार्केट’ नहीं कहा जा सकता.
प्रॉफिट बुकिंग
बिटकॉइन को पिछले काफी समय से ETF और माइक्रोस्ट्रेटजी (MicroStrategy) जैसी बड़ी कंपनियों की खरीदारी ने सहारा दिया हुआ था. शुरुआती निवेशक जो भारी मुनाफे (Unrealized Gains) पर बैठे थे, वे पिछले एक साल से धीरे-धीरे अपना प्रॉफिट बुक कर रहे थे. इस बिकवाली को संस्थागत खरीदारों (Institutional Buyers) के इनफ्लो ने अब्सॉर्ब (Absorb) कर लिया, जिसकी वजह से बिटकॉइन $1 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास टिका रहा. हालांकि, अब स्थिति बदल चुकी है. वह मजबूत इनफ्लो अब सूख चुका है. जब बड़े खरीदार शांत हो जाते हैं और रिटेल निवेशक डरे हुए होते हैं तो बाजार में लिक्विडिटी का संकट गहरा जाता है, जो कीमतों को नीचे धकेलने का काम करता है.
70% क्रैश की संभावना
बिटकॉइन कई बार 70% से अधिक टूट चुका है. आखिरी बार ऐसा 2021-2022 के दौरान हुआ था, जब कीमतें $69,000 से गिरकर $15,500 के करीब आ गई थीं. की यंग जू का तर्क है कि इस बार भी वैसा ही ‘डीप क्रैश’ आ सकता है, लेकिन उसके पीछे एक बड़ी शर्त है. उनके मुताबिक, अगर MicroStrategy जैसी दिग्गज कंपनियां, जो वर्तमान में सबसे बड़ी बिटकॉइन होल्डर हैं, अपनी रणनीति बदल देती हैं और आक्रामक खरीदार से आक्रामक विक्रेता बन जाती हैं तो बाजार को संभालना नामुमकिन होगा. यदि बिटकॉइन अपने मौजूदा ऊंचे स्तरों से 70% गिरता है, तो इसकी कीमत $37,859 तक गिर सकती है.
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