दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (सीएक्यूएम) द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल जल्द ही बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को तुरंत हटाने, अगले 5 साल में बीएस-4 वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने और बीएस-6 दोपहिया व कारों को क्रमशः साल 2035 और साल 2040 तक हटाने का प्रस्ताव दे सकता है. इसका मतलब है कि बीएस-6 वाहनों के लिए दिल्ली-एनसीआर अब बस 15 साल का घर बचा है. यानी अगर आज कोई बीएस-6 वाहन खरीदना चाहता है तो उसे सोच-समझकर पैसे लगाने होंगे.
पैनल ने बता दिया अपना फीडबैक
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने फीडबैक के लिए ड्राफ्ट रोडमैप साझा किया है. पैनल ने वायु प्रदूषण से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान दिया है, जिसमें यह पाया गया कि जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 250 से ऊपर चला जाता है, तो एक नवजात शिशु रोजाना 10-15 सिगरेट के बराबर प्रदूषण सांस में लेता है. साथ ही, केमिस्ट दुकानों पर नेब्युलाइजर और इनहेलर दवाओं की बिक्री में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई है.
क्या है इस रिपोर्ट का मकसद
पैनल की चर्चाओं से जुड़े लोगों ने बताया कि प्रस्ताव का फोकस नए पेट्रोल और डीजल वाहनों की खरीद को हतोत्साहित करने, आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और सीमित करने, स्वच्छ वाहनों की ओर बदलाव को बढ़ावा देने और उत्सर्जन मॉनिटरिंग को बेहतर करने पर है. ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार, जीरो टेलपाइप एमिशन (ZTE) वाहनों की रजिस्ट्रेशन के लिए समयसीमा तय की जानी चाहिए, जिसमें इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन फ्यूल-सेल वाहन शामिल हैं. चूंकि, कामर्शियल वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं, पैनल का मानना है कि अप्रैल 2027 के बाद रजिस्टर होने वाले सभी नए कमर्शियल दोपहिया और टैक्सी वाहन ZTE होने चाहिए.
कब से लागू होगा ZTE
अप्रैल 2028 से दिल्ली-एनसीआर में रजिस्टर होने वाले नए लाइट गुड्स वाहन जैसे पिकअप वैन और मिनी-ट्रक भी ZTE होने चाहिए. ड्राफ्ट प्रस्ताव में अप्रैल 2030 से केवल इलेक्ट्रिक कारों की रजिस्ट्रेशन का समर्थन किया गया है. एक सूत्र ने बताया कि बीएस-6 दोपहिया और कारों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए 10-15 साल का ट्रांजिशन पीरियड प्रस्तावित किया जा रहा है, ताकि हाल के वर्षों में इन्हें खरीदने वाले लोगों को नुकसान न हो. पैनल वाहन निर्माताओं को जीरो-एमिशन वाहनों (ZEVs) की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने पर विचार कर रहा है. इस साल के अंत से शुरू होने वाले पीक AQI सीजन में बीएस-4 वाहनों के इस्तेमाल को सीमित करने और 2035 के बाद बीएस-6 वाहनों पर भी रोक लगाने का समर्थन किया गया है.
चार्जिंग का मिलेगा अधिकार
इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली-एनसीआर में राइट टू चार्ज जैसा कानूनी ढांचा भी लागू किया जा सकता है. माना जा रहा है कि घरों और कार्यस्थलों पर पर्याप्त चार्जिंग सुविधा सुनिश्चित करने के लिए, पैनल ‘राइट टू चार्ज’ के लिए कानूनी ढांचा बनाने का सुझाव दे सकता है. पैनल सभी श्रेणियों के वाहन मालिकों को स्वच्छ वाहन खरीदने के लिए सब्सिडी देने की सिफारिश भी कर सकता है. इसके अलावा, पैनल ने ऑन-रोड वाहन उत्सर्जन की मॉनिटरिंग के लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है.
अभी चल रहा है पायलट प्रोजेक्ट
एनसीआर में फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसमें चुने हुए स्थानों पर रिमोट सेंसिंग डिवाइस से ऐसे टेस्ट किए जा रहे हैं. ये डिवाइस इंफ्रारेड और अल्ट्रावायलेट लाइट का इस्तेमाल कर गुजरते वाहनों से निकलने वाले असली प्रदूषकों जैसे NOx, CO, HC और PM को बिना वाहन रोके मापते हैं. हालांकि, भारत में ऐसे टेस्ट की सटीकता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि शहर की सड़कों पर वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी रखना मुश्किल है, जिससे किसी खास वाहन के उत्सर्जन को सही तरीके से मापना कठिन हो जाता है. साथ ही सिस्टम किस तरह किसी एक वाहन के उत्सर्जन को बाकी वाहनों के प्रदूषण से अलग करके आकलन करेगा, यह भी एक बड़ी समस्या है.
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