गौरव सिंह परमार, एसोसिएट डायरेक्टर, Fincorpit Consulting के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में RBI की रेपो दर 6.25% तक कम हो सकती है, और इस बीच बजट 2026 में FD निवेशकों के लिए कई नए सुधार पेश किए जा सकते हैं.
‘Flexi-FD’ और नई सुविधाएं
बजट में ‘Flexi-FD’ उत्पाद लाने की संभावना है, जिसमें निवेशक क्वार्टरली ब्याज को पुनः निवेश (reinvest) कर सकेंगे और FD तोड़ने पर कोई पेनल्टी नहीं लगेगी. यह विशेष रूप से युवाओं और मिलेनियल्स को आकर्षित करेगा, जो लगभग ₹2 लाख करोड़ लिक्विड फंड्स में निवेशित हैं. FD पर टैक्स स्ट्रचर प्रोग्रेसिव बनाया जाएगा. नए निवेशकों के लिए ₹5 लाख तक के FD पर TDS नहीं लगेगा. साथ ही, डिजिटल FDs (UPI ऐप्स के जरिए) में 80C की छूट मिलेगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 30% बचत डिजिटल हो जाएगी.
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ₹15 लाख तक FD पर 7.75% ब्याज की गारंटी दे सकती है. यह DICGC की सीमा से ऊपर सुरक्षा प्रदान करेगा और बुजुर्ग निवेशकों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत बनाएगा. साथ ही, पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन (ESG) मानकों वाले FDs को अतिरिक्त 0.5% ब्याज मिलेगा. इसके साथ इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स को भी जोड़ा जाएगा, जिससे बड़े सरकारी और निजी योजनाओं में ₹11 लाख करोड़ तक की फंडिंग आसान होगी.
बैंकों और अर्थव्यवस्था पर असर
इन सभी सुधारों से बैंकों में जमा पूंजी बढ़ेगी, खासकर कॉर्पोरेट डिपॉजिट में 15% की बढ़ोतरी के साथ. इससे बैंकों को M3 ग्रोथ 12.5% तक बढ़ाने में मदद मिलेगी और वे ग्रीन प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में आसानी से फंडिंग कर सकेंगे.
‘Savings Credit’ हो सकता है शुरू
सिद्धार्थ मौर्य, फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, Vibhavangal Anukulakara Pvt. Ltd. के अनुसार, बजट 2026 में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह नए तरीके से बदला जा सकता है. उन्होंने बताया कि सरकार ‘Savings Credit’ नाम का नया सिस्टम ला सकती है. इसके तहत अगर कोई निवेशक 3 साल या उससे ज्यादा समय की FD करता है, तो ₹2 लाख तक की ब्याज आय पर 30% तक टैक्स छूट मिल सकती है. इससे खासकर HNI (अमीर निवेशक) FD की ओर लौट सकते हैं, जो 2025 के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण म्यूचुअल फंड से दूर हो रहे हैं. अनुमान है कि इससे ₹4 लाख करोड़ तक का नया निवेश FD में आ सकता है.
MSME को मिलेगा सस्ता लोन
बजट में MSME सेक्टर के लिए भी राहत की तैयारी है. प्रस्ताव है कि डिपॉजिट को एक साथ जोड़कर (Pooling) MSME क्लस्टर्स को 9% से कम ब्याज दर पर लोन दिया जाए. इससे देश के करीब 6 करोड़ छोटे और मझोले उद्योगों की वर्किंग कैपिटल समस्या कम हो सकती है.
महंगाई से सुरक्षा देने वाली FD
जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते, उनके लिए Inflation-Indexed FD लाने का सुझाव दिया गया है. इसमें निवेशकों को CPI (महंगाई दर) + 1% रिटर्न मिलेगा और मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। ऐसे निवेशकों की संख्या देश में करीब 40% मानी जाती है. बैंकों को ‘Family FD Packs’ शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है. इसमें पति-पत्नी के नाम संयुक्त FD होगी, जिससे टैक्स का बोझ कम किया जा सकेगा और परिवार की बचत बेहतर तरीके से प्लान हो सकेगी।
हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ा फायदा
AA योजना के तहत अगर कोई निवेशक अपनी FD का कुछ हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में बदलता है, तो उसे 50% तक की छूट मिल सकती है। इससे स्वास्थ्य सुरक्षा और बचत—दोनों को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा सिद्धार्थ मौर्य का ये भी कहना है कि ये सभी सुधार RBI के 13.5% क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेंगे. साथ ही, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में कटौती के बीच रुपये की स्थिरता मजबूत होगी और FD को समान और सुरक्षित आर्थिक विकास की मजबूत नींव के रूप में स्थापित किया जा सकेगा.
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