लोकल18 से बातचीत में प्रेमबती देवांगन ने बताया कि उन्होंने पहले पारंपरिक तरीके से मशरूम उत्पादन शुरू किया. तैयार मशरूम को स्थानीय बाजार में बेचा जाता था, लेकिन कई बार बिक्री के बाद कुछ मशरूम बच जाया करते थे. इसी चुनौती ने उन्हें नया रास्ता दिखाया.
कम पड़ने लगा मांग के मुकाबले उत्पादन
उन्होंने सोचा कि बचे हुए मशरूम से वैल्यू एडिशन किया जाए और तभी मशरूम से आचार, पापड़ और बडी जैसे उत्पाद बनाने की शुरुआत की. धीरे-धीरे मशरूम से बने इन उत्पादों की मांग बाजार में बढ़ने लगी. खासकर मशरूम आचार इतना लोकप्रिय हुआ कि उसकी मांग के मुकाबले उत्पादन कम पड़ने लगा. आज प्रेमबती देवांगन पूरे बालोद जिले में मशरूम उत्पादों के लिए पहचानी जाती हैं.
प्रेमबती सिर्फ अपने उत्पाद ही नहीं बेचतीं, बल्कि जिले के अन्य बिहान महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को भी बाजार तक पहुंचाती हैं. वे महुआ लड्डू, बेर आचार, बड़ी, पापड़, तिल लड्डू, सोंठ लड्डू, अगरबत्ती और फिनाइल जैसे उत्पादों की बिक्री करती हैं और संबंधित महिलाओं को उनका पूरा मुनाफा देती हैं. इससे कई महिला समूहों को स्थायी आय का जरिया मिला है.
60 हजार रुपये की शुद्ध आय
प्रेमबती देवांगन महिलाओं को मशरूम उत्पादन और प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण भी देती हैं, जिससे ग्रामीण महिलाएं घर बैठे रोजगार से जुड़ पा रही हैं. वे साल में मशरूम की चार फसल लेती हैं, जिससे केवल मशरूम उत्पादन से ही उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की शुद्ध आय होती है. वहीं अन्य उत्पादों की बिक्री से वे करीब एक लाख रुपये सालाना कमा लेती हैं.
इसी निरंतर मेहनत और आय के कारण प्रेमबती देवांगन का नाम ‘लखपति दीदी’ की सूची में शामिल किया गया है. खास बात यह है कि यह सारा काम वे पार्ट टाइम वर्क की तरह करती हैं. शासन की ओर से मिल रहे सहयोग और बिहान योजना ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है.
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