विशेषज्ञों का कहना है कि यह बजट शेयर बाजार के लिए कोई बड़ा ट्रिगर नहीं बनेगा, लेकिन यह साफ कर देगा कि सरकार का लॉन्ग टर्म फोकस न्यूक्लियर पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज और ट्रांसमिशन पर ही रहेगा. आने वाले वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इन क्षेत्रों को मजबूत करने की दिशा में काम जारी रखेगी.
रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस
अगर ट्रेंड्स की बात करें तो रिन्यूएबल एनर्जी अभी भी सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है, खासतौर पर सोलर पावर और रूफटॉप सोलर पर जोर बना हुआ है. इसके साथ ही न्यूक्लियर पावर को भी अब ज्यादा अहमियत दी जा रही है, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसके अलावा एनर्जी स्टोरेज, जैसे बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, भविष्य की जरूरत के तौर पर उभर रहे हैं वहीं, रिन्यूएबल बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर भी लगातार काम किया जा रहा है.
पिछले साल बजट में हुए ये बदलाव
हालांकि, इस सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं न्यूक्लियर और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में लागत ज्यादा होती है और इन्हें पूरा होने में लंबा समय लगता है. कई रिन्यूएबल-समृद्ध राज्यों में अब भी ट्रांसमिशन की दिक्कतें बनी हुई हैं. इसके अलावा, डिस्कॉम्स की कमजोर वित्तीय स्थिति भी एक बड़ी समस्या है, जिस पर सरकार लगातार सुधार की कोशिश कर रही है. पिछले बजट की बात करें, तो सरकार ने न्यूक्लियर पावर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी के लिए नियमों में बदलाव किया था. साथ ही स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर के लिए अलग मिशन, पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो को रेगुलेटेड फ्रेमवर्क में लाना, डिस्कॉम सुधार और स्मार्ट मीटरिंग पर जोर और सोलर पावर को बढ़ावा जैसे कदम उठाए गए थे.
टैक्स और GST सुधारों की भी मांग
इस बार इंडस्ट्री की उम्मीदें भी इन्हीं क्षेत्रों से जुड़ी हैं कंपनियां चाहती हैं कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए टैक्स और फाइनेंसिंग में राहत, रूफटॉप सोलर के लिए ज्यादा बजट, बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो को पॉलिसी सपोर्ट, और ट्रांसमिशन व ग्रीन कॉरिडोर के लिए फंडिंग जारी रहे. साथ ही डिस्कॉम सुधारों पर भी सरकार का ध्यान बना रहे. डेलॉयट इंडिया के पार्टनर अश्विन जैकब के मुताबिक, इंडस्ट्री कुछ खास टैक्स और GST सुधारों की भी मांग कर रही है, जिससे प्रोजेक्ट्स को आर्थिक रूप से ज्यादा व्यवहारिक बनाया जा सके वहीं, मिराए एसेट शेयरखान के अंकित सोनी का मानना है कि इस बजट में पावर सेक्टर का कुल आवंटन करीब 45,000 से 60,000 करोड़ रुपये रह सकता है, जिसमें बड़ा हिस्सा बैटरी एनर्जी स्टोरेज पर खर्च होने की उम्मीद है उनके मुताबिक, रूफटॉप सोलर को पिछले बजट जैसा ही सपोर्ट मिल सकता है, जबकि बड़े बजट इजाफे की संभावना कम है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट पावर सेक्टर के लिए दिशा दिखाने वाला होगा, न कि तुरंत बाजार में उछाल लाने वाला न्यूक्लियर और हाइड्रो जैसे प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में 5 से 7 साल लगते हैं, इसलिए इन ऐलानों का असर लंबी अवधि में दिखेगा हालांकि, मजबूत बिजली मांग के चलते FY26 में सेक्टर की ग्रोथ बनी रहने की उम्मीद है, और रेगुलेटेड यूटिलिटीज, ट्रांसमिशन कंपनियां और चुनिंदा पावर जेनरेशन कंपनियां निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प बनी रह सकती हैं.
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