बजट 2026 से पहले नेशनल पेंशन सिस्टम की अतिरिक्त टैक्स छूट सीमा बढ़ाने की चर्चा तेज हो गई है. मौजूदा 50000 रुपये की लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किए जाने की संभावना जताई जा रही है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो मिडिल इनकम टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी और लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट सेविंग को नया बूस्ट मिलेगा.
अगर यह बदलाव लागू होता है तो मिडिल इनकम ग्रुप के लिए यह सीधा फाइनेंशियल बूस्ट साबित हो सकता है. बढ़ी हुई लिमिट का मतलब है ज्यादा टैक्स फ्री सेविंग और भविष्य के लिए बड़ा पेंशन कॉर्पस तैयार करने का मौका. यही वजह है कि सैलरीड क्लास से लेकर सेल्फ एम्प्लॉयड तक इस संभावित फैसले पर खास नजर बनाए हुए हैं.
सैलरीड कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा
टैक्स एक्सपर्ट राजर्षि दासगुप्ता (Rajarshi Dasgupta) जो एक्विलॉ (Aquilaw) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, मानते हैं कि सैलरीड टैक्सपेयर्स को इस बदलाव से सबसे ज्यादा राहत मिलेगी. उनके मुताबिक जिन कर्मचारियों की इनकम पहले से ऊंचे टैक्स स्लैब में आती है, उनके लिए बढ़ी हुई एनपीएस लिमिट से टैक्स देनदारी में अच्छी खासी कटौती हो सकती है. हालांकि सरकारी कर्मचारियों के पास पहले से पेंशन स्ट्रक्चर मौजूद है, इसलिए उनके लिए यह बदलाव टैक्स सेविंग से ज्यादा लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट इनकम के लिहाज से अहम रहेगा.
सेल्फ एम्प्लॉयड के लिए जरूरी पुश
राजर्षि दासगुप्ता (Rajarshi Dasgupta) का कहना है कि सेल्फ एम्प्लॉयड वर्ग रिटायरमेंट सेविंग के मामले में अभी भी कम कवर है क्योंकि उनके पास ईपीएफ जैसी सुविधा नहीं होती. अगर एनपीएस में ज्यादा टैक्स छूट खासतौर पर इस ग्रुप के लिए आकर्षक बनाई जाती है तो इससे देश के बड़े वर्कफोर्स को रिटायरमेंट प्लानिंग की ओर मजबूती से जोड़ा जा सकता है. यह लंबे समय में सोशल सिक्योरिटी सिस्टम को भी मजबूत करेगा.
मिडिल इनकम टैक्सपेयर्स को कितनी बचत
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर एनपीएस की अतिरिक्त लिमिट 1 लाख या उससे ऊपर बढ़ाई जाती है तो 8 से 15 लाख रुपये सालाना कमाने वाले मिडिल इनकम टैक्सपेयर्स को 10000 से 21000 रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स बचत हो सकती है. यह बचत केवल टैक्स रिलीफ नहीं है बल्कि भविष्य के पेंशन फंड को भी बड़ा करने का जरिया बन सकती है.
क्या एनपीएस बाकी सेविंग विकल्पों की जगह लेगा
रोहिताश्व सिन्हा (Rohitaashv Sinha) जो किंग स्टब्ब एंड कसिवा (King Stubb and Kasiva) में पार्टनर हैं, मानते हैं कि एनपीएस की लिमिट बढ़ने से ईपीएफ, पीपीएफ या इंश्योरेंस जैसे सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स खत्म नहीं होंगे. हर विकल्प का रिस्क, लिक्विडिटी और उद्देश्य अलग होता है, इसलिए ये सभी साथ साथ चलते रहेंगे. एनपीएस की बढ़ी हुई लिमिट सिर्फ मार्केट लिंक्ड पेंशन सेविंग को ज्यादा आकर्षक बनाएगी.
सिर्फ टैक्स छूट से पूरी समस्या हल नहीं होगी
एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि टैक्स इंसेंटिव बढ़ाने से एनपीएस में भागीदारी जरूर बढ़ेगी, लेकिन भारत की रिटायरमेंट सेविंग गैप को भरने के लिए इससे ज्यादा व्यापक पॉलिसी कदमों की जरूरत होगी. लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल अवेयरनेस, स्टेबल रिटर्न स्ट्रक्चर और भरोसेमंद सिस्टम ही रिटायरमेंट सिक्योरिटी को मजबूत बना सकते हैं.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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