मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट एक्सपर्ट्स ने जानकारी दी है कि निफ्टी को 25,715 से 25,620 के दायरे में सपोर्ट मिला है, लेकिन अभी तेजी के साफ संकेत नहीं दिख रहे हैं. अगर निफ्टी 25,715 के ऊपर टिकता है, तो इसमें 26,020 तक की तेजी आ सकती है. वहीं, अगर यह 25,600 के नीचे फिसलता है, तो अगला स्तर 25,060 हो सकता है. फिलहाल, वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की चाल पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी. आज शेयर मार्केट में गिरावट के पीछे कुछ अहम वजहें हैं-
1) विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से आ रहा है. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को FIIs ने ₹1,499.81 करोड़ के शेयर बेचे. यह जनवरी में लगातार 7वां दिन रहा जब विदेशी निवेशकों ने शुद्ध बिकवाली की. डीलरों के मुताबिक, विदेशी फंड्स की यह लगातार निकासी खासतौर पर लार्ज-कैप शेयरों पर असर डाल रही है, जिससे बाजार में मजबूती नहीं बन पा रही है.
2) कमजोर ग्लोबल संकेत
एशियाई बाजारों से भी निवेशकों को कोई खास सहारा नहीं मिला. चीन का शंघाई SSE कंपोजिट इंडेक्स गिरावट में रहा. अमेरिकी बाजार भी रातभर कमजोरी के साथ बंद हुए और वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे अमेरिका में कमजोर शुरुआत के संकेत मिले. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और FII बिकवाली की वजह से वैश्विक माहौल फिलहाल अनुकूल नहीं है. इसी कारण भारतीय बाजार पर भी दबाव बना हुआ है.
3) टैरिफ और जियो पॉलिटिकल टेंशन
निवेशकों की चिंता अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर भी बनी हुई है. 14 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उन टैरिफ पर फैसला आने की संभावना है, जिन्हें पिछले साल अप्रैल में ट्रंप प्रशासन ने लागू किया था. ये टैरिफ 10% से 50% के बीच हैं और कई बड़े देशों पर लगाए गए थे. इन टैरिफ को अदालत में यह कहकर चुनौती दी गई है कि ये राष्ट्रपति की अधिकार सीमा से बाहर हैं. अगर टैरिफ बने रहते हैं, तो इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है और उभरते बाजारों, जैसे भारत, में पूंजी निवेश प्रभावित हो सकता है.
इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25% टैरिफ लगा सकता है. ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई, तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा. इन बयानों से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है.
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