भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला आगामी व्यापार समझौता रुपये की मजबूती और विदेशी निवेशकों के भरोसे के लिए बेहद निर्णायक साबित होगा. वर्तमान में रुपया डॉलर के मुकाबले 91.98 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, ऐसे में इस डील के पूरा होते ही निवेशक भारतीय बाजार के प्रति अपने नजरिए का सकारात्मक पुनर्मूल्यांकन कर सकते हैं. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, कृषि उत्पादों पर मिली हालिया टैरिफ छूट ने इस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर दिया है.
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट और बाजार का दबाव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय रुपया भारी दबाव के दौर से गुजर रहा है. 30 जनवरी 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.98 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. जनवरी 2026 के दौरान रुपये में लगभग 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर 2022 के बाद की सबसे खराब मासिक गिरावट है. विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और कॉर्पोरेट जगत में डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये की स्थिति को कमजोर किया है. ऐसे में अमेरिका के साथ होने वाली यह ट्रेड डील अनिश्चितता के बादलों को हटाने में मददगार साबित हो सकती है.
कृषि उत्पादों पर टैरिफ छूट से बढ़ी उम्मीदें
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत और अमेरिका अब तक छह दौर की बातचीत पूरी कर चुके हैं. हाल ही में अमेरिका द्वारा 200 से अधिक भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों को उच्च टैरिफ (सीमा शुल्क) से छूट देने का फैसला एक सकारात्मक बदलाव है. इस कदम से भारतीय मसाले, चाय, कॉफी और नट्स जैसे उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. यह छूट न केवल निर्यातकों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि इसने दोनों देशों के बीच भविष्य में होने वाले बड़े व्यापारिक समझौते के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर दिया है.
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की मजबूत स्थिति
हालांकि वैश्विक स्तर पर प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की धीमी आर्थिक वृद्धि और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण का मानना है कि ये परिस्थितियां भारत के लिए केवल बाहरी अनिश्चितताएं हैं, न कि कोई गंभीर व्यापक आर्थिक तनाव. भारत और अमेरिका दोनों ही इस साल के अंत तक एक ‘परस्पर लाभकारी समझौते’ पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं. यदि यह डील समय पर पूरी होती है, तो यह न केवल रुपये को सहारा देगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक साख को और भी मजबूत करेगी.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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