भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने संकेत दिया है कि बजट में किए गए बदलावों के बावजूद कैपिटल गेन्स टैक्स और कर्ज के साधनों (Debt Instruments) पर लगने वाले कर की समीक्षा की अभी और गुंजाइश है. उन्होंने साफ किया कि देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए टैक्स नियमों को अधिक सरल और तर्कसंगत बनाना जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी कंपनियों में विनिवेश और राज्यों द्वारा किए जाने वाले भारी नकद हस्तांतरण (Cash Transfers) पर भी महत्वपूर्ण विचार रखे हैं.
सरकारी कंपनियों में बड़ी विनिवेश योजना के संकेत
आर्थिक सर्वेक्षण में एक क्रांतिकारी विचार पेश किया गया है, जिसके तहत सरकारी कंपनियों (PSUs) में सरकार की हिस्सेदारी को घटाकर 26 प्रतिशत तक लाने का सुझाव दिया गया है. हालांकि, सरकार के पास ‘विशेष प्रस्ताव अधिकार’ सुरक्षित रहेंगे. नागेश्वरन ने बताया कि यह विचार 2021 की विनिवेश नीति के अनुरूप है. इसका उद्देश्य गैर-कर राजस्व (Non-tax Receipts) को बढ़ाना और वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी यानी नकदी के प्रवाह को बेहतर बनाना है. यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो यह आने वाले समय में बड़े विनिवेश लक्ष्यों की वापसी का संकेत हो सकता है.
मुफ्त की रेवड़ी और कैश ट्रांसफर पर जताई चिंता
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने राज्यों द्वारा किए जा रहे बड़े ‘कैश ट्रांसफर’ या नकद हस्तांतरण को लेकर चेतावनी भी दी है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस तरह के खर्चों से न केवल राज्यों की वित्तीय स्थिति बिगड़ती है, बल्कि यह लोगों की कौशल सीखने (Upskilling) और काम करने की इच्छा को भी प्रभावित कर सकता है. नागेश्वरन के मुताबिक, इसका दूरगामी असर देश की सॉवरेन उधारी लागत (Borrowing Costs) पर भी पड़ सकता है. सरकार का मानना है कि पूंजी का उपयोग उत्पादक कार्यों में होना चाहिए न कि केवल उपभोग बढ़ाने वाले नकद वितरण में.
रुपये की मजबूती और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता
भारतीय रुपये के प्रदर्शन पर बात करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि रुपये की मौजूदा स्थिति भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को पूरी तरह पेश नहीं करती है. उन्होंने निवेशकों के फीडबैक के हवाले से बताया कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता (Trade Deal) रुपये की सेहत के लिए एक बड़ा कारक है. जैसे ही इन वार्ताओं का कोई ठोस समाधान निकलेगा, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार के प्रति अपना नजरिया बदलेंगे, जिससे रुपये को नई मजबूती मिल सकती है. फिलहाल बाजार इस बड़े घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है.
‘स्वदेशी’ के साथ प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता पर जोर
सर्वेक्षण में ‘डिसिप्लिनिंग स्वदेशी’ (Disciplining Swadeshi) का एक नया मंत्र दिया गया है. इसका अर्थ है कि स्वदेशीकरण केवल संरक्षण के लिए नहीं, बल्कि गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए होना चाहिए. नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि भारतीय उद्योगों को सुरक्षा तभी मिलनी चाहिए जब वे अपनी उत्पादकता बढ़ाएं और निर्यात में सक्षम बनें. इससे भारतीय उत्पाद न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी धाक जमा सकेंगे. यह दृष्टिकोण भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
विकास दर और भविष्य का रोडमैप
भारत की विकास दर के बारे में CEA ने काफी उत्साहजनक रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि 7 प्रतिशत की विकास दर अब एक यथार्थवादी लक्ष्य है, जिसे बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश और राज्य स्तर के सुधारों के जरिए और भी ऊपर ले जाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि हमें केवल किसी एक संख्या (जैसे 8 प्रतिशत) पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उन कार्यों पर जोर देना चाहिए जो व्यापारिक लागत को कम करें और एआई (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में कुशल जनशक्ति तैयार करें. कौशल विकास और नियमों का सरलीकरण ही भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की कुंजी होगी.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.