India Dairy Industry : भारत में पशुपालन करने वाले 38 फीसदी लोगों का कहना है कि वे सिर्फ दूध बेचने के लिए यह काम नहीं करते हैं. रिपोर्ट में दुग्ध उत्पादन के अलावा भी पशुओं की जरूरतों पर जोर दिया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, देश के एक तिहाई से ज्यादा पशुपालक दूध नहीं बेचते और इसके बजाय वे घरेलू पोषण, गोबर और खेती संबंधी अन्य कामकाज में पशुओं के इस्तेमाल पर जोर देते हैं. यह डेयरी उत्पादन से आगे की नीतियों की जरूरत को बताता है. ‘एनर्जी, एनावायरनमेंट एंड वाटर काउंसिल’ (सीईईडब्ल्यू) की रिपोर्ट के अनुसार, ये नतीजे इस मान्यता को चुनौती देते हैं कि भारत का मवेशी क्षेत्र मुख्य रूप से दूध की बिक्री से चलता है. रिपोर्ट के लिए 15 राज्यों में 7,350 मवेशी पालने वाले परिवारों का सर्वेक्षण किया, जो देश की 91 फीसदी दुधारू आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं.
किस राज्य में कितने पशुपालक नहीं बेचते दूध
अध्ययन में पाया गया कि लगभग 38 फीसदी पशुपालक या लगभग तीन करोड़ लोग, दूध की बिक्री को मवेशी रखने की प्रेरणा नहीं मानते हैं. झारखंड में यह हिस्सा 71 फीसदी और पश्चिम बंगाल व हिमाचल प्रदेश में 50 फीसदी से ज्यादा है. पशुपालकों का एक बड़ा हिस्सा पशुपालन जारी रखने की इच्छा रखता है. इसमें कहा गया है कि इसलिए इस क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करना एक जरूरी नजरिया है जिस पर नीतियां बनाते समय विचार किया जाना चाहिए.
चारे की चुनौतियों से जूझ रहे लोग
अध्ययन में पाया गया कि लगभग तीन-चौथाई पशुपालकों को इलाके में ज्यादा दूध होने के बावजूद सस्ता चारा और आहार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. 7 फीसदी पशुपालक यानी देशभर में लगभग 56 लाख पशुपालक मवेशियों को दूध के अलावा दूसरे कामों के लिए रखते हैं. इसमें गोबर, बैलगाड़ी खींचने या जानवरों को बेचने से होने वाली कमाई जैसे कार्य शामिल हैं. पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में यह लगभग 15 फीसदी है. हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और असम में 15 फीसदी से ज्यादा पशुपालक मवेशी रखने की अपनी मुख्य वजह सामाजिक-सांस्कृतिक या धार्मिक वजह बताते हैं.
गायों से दूध के अलावा भी फायदे
अध्ययन के दौरान जब गायों से जुड़े फायदों की रैंकिंग की गई तो 34 फीसदी पशुपालकों ने घर में इस्तेमाल होने वाले दूध को सबसे पहले रखा, जबकि 20 फीसदी ने दूध से अलग वजहों को अपनी मुख्य चिंता बताई. बाजार के अलावा दूसरे इस्तेमाल के लिए मवेशी रखने वाले ज्यादातर घरों में आम तौर पर एक या दो देसी जानवर होते हैं, जो खेती के कामकाज में उनकी अहम भूमिका को दिखाता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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