अभी ये सिर्फ ड्राफ्ट हैं इसलिए फाइनल होने तक थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा लेकिन अगर लागू हुए तो क्रेडिट कार्ड से बड़े खर्च करने वालों को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. इन नियमों के बारे में आपको बताते हैं.
पहला नियम
ड्राफ्ट नियमों में क्रेडिट कार्ड खर्च को लेकर सख्ती का प्रस्ताव रखा गया है. एक वित्तीय वर्ष में अगर कोई व्यक्ति ₹10 लाख या उससे ज्यादा का डिजिटल पेमेंट (नकद को छोड़कर) करता है तो इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दी जा सकती है. बैंक या कार्ड कंपनी ऐसे बड़े ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट करेगी, यानी बड़े खर्च अब टैक्स विभाग की नजर में रहेंगे. वहीं ₹1 लाख या उससे ज्यादा के नकद बिल की भी सूचना दी जा सकती है. यह पूरी तरह नया नियम नहीं है, पहले भी ऐसी व्यवस्था थी, लेकिन अब इसे और ज्यादा स्पष्ट और सख्त बनाने की तैयारी है. इसका मकसद बड़े खर्चों पर नजर रखना और टैक्स नियमों का पालन मजबूत करना है.
दूसरा नियम
अब क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट भी एड्रेस प्रूफ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. पिछले तीन महीने के अंदर का बिल मान्य होगा और इसे PAN आवेदन के समय पते के प्रमाण के रूप में दिया जा सकता है. इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके पास बिजली बिल जैसे पारंपरिक दस्तावेज नहीं हैं. हालांकि शर्त यह है कि स्टेटमेंट में आपका सही और अपडेटेड पता साफ तौर पर दर्ज होना चाहिए.
तीसरा नियम
अब तक इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड जैसे डिजिटल तरीके ही इस्तेमाल किए जाते थे. नए ड्राफ्ट नियमों में क्रेडिट कार्ड को भी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के ऑप्शन के रूप में शामिल किया जा सकता है. यानी आगे चलकर आप क्रेडिट कार्ड से भी इनकम टैक्स भर सकेंगे. इससे करदाताओं को एक अतिरिक्त सुविधा मिलेगी. हालांकि, क्रेडिट कार्ड से टैक्स भरने पर बैंक प्रोसेसिंग फीस या ब्याज ले सकता है, जिससे कुल खर्च बढ़ सकता है. इसलिए इस सुविधा का उपयोग करने से पहले संभावित अतिरिक्त शुल्क को जरूर समझ लें.
चौथा नियम
अगर कोई कंपनी अपने कर्मचारी को क्रेडिट कार्ड देती है, तो उसके खर्च पर कुछ नियम लागू होते हैं. कंपनी द्वारा किया गया निजी खर्च “परक्विजिट” यानी सैलरी के अतिरिक्त लाभ के रूप में माना जा सकता है और उस पर टैक्स लग सकता है. लेकिन अगर खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम, जैसे बिजनेस ट्रिप, मीटिंग या क्लाइंट एंटरटेनमेंट के लिए है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा. कंपनी को हर खर्च का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है और यह साबित करना पड़ सकता है कि खर्च सिर्फ ऑफिस के काम के लिए था. अगर कर्मचारी ने खुद कुछ राशि चुकाई है, तो टैक्स की गणना करते समय उस राशि को कुल मूल्य से घटा दिया जाएगा.
पांचवा नियम
नए नियमों के अनुसार, किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से क्रेडिट कार्ड लेने के लिए PAN देना अनिवार्य होगा. बिना PAN के आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसका उद्देश्य बड़े लेनदेन को आयकर विभाग से जोड़ना और फर्जी या बेनामी खर्चों पर रोक लगाना है.
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