12 फरवरी 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखी गई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के कारण बाजार में चिंता बढ़ी है, जिससे दाम ऊपर चढ़ रहे हैं. ब्रेंट क्रूड 0.39% बढ़कर 69.67 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 0.45% चढ़कर 64.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. मध्य पूर्व में तनाव के चलते तेल कीमतों में लगातार जोखिम प्रीमियम जुड़ रहा है. भारत जैसे देशों के लिए जहां तेल आयात ज्यादा होता है ऐसे में कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई पर असर पड़ सकता है.
वहीं अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 64.92 डॉलर प्रति बैरल पर है जो 0.45 प्रतिशत ऊपर गया है. ये कीमतें पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही हैं और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण रिस्क प्रीमियम जुड़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करने के बाद कहा कि ईरान के साथ अभी कोई फाइनल डील नहीं हुई है लेकिन बातचीत जारी रहेगी. अगर डील नहीं बनी तो मिडिल ईस्ट में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजा जा सकता है. ये बयान बाजार में और डर पैदा कर रहा है.
एक्सपर्स से जानें कितना गिरेगा तेल का भाव?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर कीमतें 65-66 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं तो मिडिल ईस्ट में तनाव ज्यादा माना जाएगा. वहीं अगर शांति की प्रक्रिया आगे बढ़ी और तनाव कम हुआ तो कीमतें 60-61 डॉलर तक गिर सकती हैं. अमेरिका की इकोनॉमी मजबूत दिख रही है जिससे तेल की डिमांड अच्छी बनी हुई है. जनवरी में जॉब ग्रोथ अच्छी रही और बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत पर आ गई है जो इकोनॉमी के बेहतर होने का संकेत है. इससे भी तेल की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है.
बाजार में जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ रहा है. अमेरिका-ईरान तनाव के कारण सप्लाई डिसरप्शन का खतरा है जबकि अमेरिका में क्रूड स्टॉक बढ़ने की खबरें भी आई हैं लेकिन अभी तनाव का असर ज्यादा है. आने वाले दिनों में बातचीत के नतीजे और नए डेवलपमेंट पर नजर रहेगी. भारत जैसे देशों के लिए जहां तेल आयात ज्यादा होता है ऐसे में कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई पर असर पड़ सकता है. निवेशक और आम लोग दोनों ये देख रहे हैं कि स्थिति क्या बनती है. फिलहाल कीमतें ऊपर की तरफ हैं लेकिन कोई बड़ा फैसला या डील होने पर बदलाव आ सकता है.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, यूएस में पिछले हफ्ते क्रूड ऑयल का स्टॉक 8.5 मिलियन बैरल बढ़कर जून के बाद सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया. गुरुवार को बाद में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी अपना मंथली आउटलुक जारी करने वाली है, जो फिर से ग्लोबल ग्लूट की ओर इशारा कर सकता है.
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयर्स फिसले
12 फरवरी को कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बढ़त के बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में गिरावट देखी गई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल महंगा हुआ, जिससे निवेशकों ने इन शेयरों में बिकवाली की. बीपीसीएल का शेयर 2.20% गिरकर 379.05 रुपये पर आ गया, जबकि आईओसी 1.54% टूटकर 178.50 रुपये और एचपीसीएल 1.52% गिरकर 454.80 रुपये पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ता है.
(Disclaimer: यहां बताए गए स्टॉक्स ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)
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