Dollar vs Rupee : भारतीय करेंसी ने गुरुवार को डॉलर के मुकाबले तेज उछाल दर्ज किया. इसकी वजह आरबीआई की दखल को माना जा रहा है. रिजर्व बैंक ने फॉरेक्स मार्केट में आज सुबह-सुबह ही डॉलर की बिक्री शुरू कर दी, जिसका फायदा भारतीय करेंसी को मिला.
आरबीआई के दखल से रुपये में आज तेजी दिख रही है.
फॉरेक्स मार्केट से जुड़े 6 बैंकरों ने बताया कि रिजर्व बैंक ने गुरुवार को स्थानीय बाजार खुलने से पहले डॉलर की भारी बिक्री की ताकि रुपये को मजबूती मिले. इस कदम का पैमाना और समय ज्यादातर बाजार प्रतिभागियों के लिए चौंकाने वाला रहा. आज सुबह रुपया बाजार खुलते ही 90.45 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 90.70 पर बंद हुआ था. यह बदलाव इंटरबैंक ऑर्डर-मैचिंग सिस्टम में और भी ज्यादा दिखा, जहां मुद्रा 90.14 तक पहुंच गई.
सभी की समझ से परे फैसला
एक बड़े सरकारी बैंक को सबसे आक्रामक विक्रेताओं में से एक बताया गया है, जिसमें एक बैंक अधिकारी ने कहा कि डॉलर की आपूर्ति बिना किसी भेदभाव के की गई. एक बैंक के मुद्रा व्यापारी ने बताया कि मुझे नहीं लगता कि कोई भी इस स्थिति की भविष्यवाणी कर सकता था. यह समझना मुश्किल है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया और आज ही क्यों किया. उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में रुपया इसी स्तर पर कारोबार कर रहा था, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से कोई असहजता नजर नहीं आई थी.
ट्रेड डील के बाद किया हस्तक्षेप
आरबीआई का हस्तक्षेप हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में आया है, जिससे रुपये में तेजी देखने को मिली थी. हालांकि, शुरुआती उछाल के बाद मुद्रा को बड़ी कंपनियों की लगातार हेजिंग मांग और आयातकों द्वारा नियमित डॉलर खरीद के कारण संघर्ष करना पड़ा है. एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा कि क्या ऐसा हो सकता है कि आरबीआई, इतने बड़े ट्रिगर के बाद, रुपया को और कमजोर नहीं होने देना चाहता था, खासकर 91 के स्तर को पार न करे? शायद इसी वजह से उन्होंने बाजार खुलने से पहले भारी बिक्री की, ताकि अपने पसंदीदा स्तर का संकेत दे सकें.
पहले कुछ और था फैसला
इससे पहले केंद्रीय बैंक ने कई बार कहा है कि वह रुपये के लिए किसी खास स्तर या दायरे को निशाना नहीं बनाता और केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप करता है. वैश्विक बाजारों में बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी देखी गई क्योंकि आंकड़ों से पता चला कि जनवरी में अर्थव्यवस्था में उम्मीद से ज्यादा नौकरियां जुड़ी हैं. डॉलर इंडेक्स शुरू में बढ़ा, लेकिन बाद में 97 के स्तर से नीचे आ गया, जबकि एशियाई मुद्राएं ज्यादातर मजबूत रहीं. आरबीआई के हस्तक्षेप के बाद अब रुपये में भी सुधार दिख रहा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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