Crude Price vs War : दुनिया में जब भी युद्ध की आग भड़की है तो उसकी लपटों से हमेशा कच्चे तेल के दाम भड़क उठे हैं. बात चाहे 35 साल पहले खाड़ी युद्ध की हो या फिर अभी चल रहे ईरान-अमेरिका युद्ध. इन सभी युद्धों ने हर बार तेल के दाम में आग लगाई है. इस बार भी क्रूड का भाव एक ही दिन में 13 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 82 डॉलर के पार जा चुका है और खाड़ी युद्ध के समय भी इसमें 140 फीसदी का उछाल आया था.
हर बार युद्ध के बाद क्रूड के भाव में तेज उछाल आता है.
खाड़ी युद्ध (Gulf War)
सबसे पहले बात करते हैं साल 1990 में हुए खाड़ी युद्ध की. यह बात तो सभी को पता है कि खाड़ी देशों में ही तेल के असली भंडार हैं और वहां कुछ भी बुरा होने पर सबसे ज्यादा असर तेल पर ही होता है. फरवरी 1991 में इराक ने सऊदी अरब और इजराइल पर स्कड मिसाइलें दागी और कुओं में आग लगा दी थी. तब क्रूड का भाव 17 डॉलर प्रति बैरल से 140 फीसदी बढ़कर 41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे.
सऊदी अरामको का ड्रोन हमला
सितंबर, 2019 में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से सऊदी अरब के तेल भंडार पर हमला किया था. इससे ग्लोबल तेल सप्लाई का करीब 5 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ था और 57 लाख बैरल तेल रोजाना के उत्पादन पर असर पड़ा था. इस हमले के बाद एक ही दिन में कच्चे तेल का भाव 20 फीसदी बढ़कर 69 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था.
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर
फरवरी, 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया जिससे एक बार फिर ग्लोबल तेल सप्लाई को तगड़ा झटका लगा. दुनियाभर में तेल की सप्लाई बाधिक हो गई और कीमतों में असामान्य रूप से उछाल दिखना शुरू हो गया. तब क्रूड का भाव 80 डॉलर के आसपास चल रहा था, जो कुछ ही दिनों में बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल के भाव को भी पार कर गया. यह किसी भी युद्ध के बाद बढ़ने वाले सबसे ज्यादा तेल के दाम थे.
ईरान और अमेरिका युद्ध
ईरान और इजराइल के बीच पिछले साल जून से ही तनाव चल रहा था. साल 2025 में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बमबारी भी की थी, लेकिन अब मार्च की शुरुआत में अमेरिका ने भीषण हमला किया. इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया और ग्लोबल तेल सप्लाई एक बार फिर बाधित हो गई. इस युद्ध के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी तक उछाल दिखा और 70 डॉलर के आसपास दिख रहा क्रूड 85 डॉलर के करीब पहुंच गया.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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