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ईरान ने सऊदी अरब की रिफाइनरी अरामको पर हमला बोला है. अरामको दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी है अैर यह हर दिन औसतन 10-12 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है.
अरामको की स्थापना 1933 में हुई थी.
नई दिल्ली. जब बात दौलत, दबदबे और दुनिया को चलाने वाले ईंधन की आती है, तो एक ही नाम सबसे ऊपर आता है. वो नाम है सऊदी अरामको (Saudi Aramco). दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफायनरी पर आज हमला हुआ तो ये फिर चर्चा में आ गई. यह महज एक कंपनी नहीं, बल्कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और ग्लोबल एनर्जी मार्केट का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. इसकी हैसियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कई बार Apple और Microsoft जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को पछाड़कर दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बन जाती है.
सऊदी अरामको की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी रिफाइनरियों में से एक, रास तनुरा (Ras Tanura) को ईरान ने आज ड्रोन से निशाना बनाया है. आज सुबह हुए इस ड्रोन हमले के तुरंत बाद रिफाइनरी परिसर में आग लग गई. अरामको द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आग ‘सीमित’ स्तर की थी जिसे कंपनी के फायर फाइटिंग सिस्टम और आपातकालीन दलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए समय रहते काबू में कर लिया. राहत की बात यह है कि इस पूरी घटना में किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई खबर नहीं है.
1933 में शुरू हुई अरामको
अरामको की कहानी साल 1933 में शुरू हुई थी, जब इसकी नींव अमेरिकी साझेदारी के साथ पड़ी थी. हालांकि, 1980 तक आते-आते सऊदी सरकार ने इसका पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया. आज इसका मुख्यालय सऊदी अरब के धहरान में है और यहां 75,000 काम करते हैं. इसका मार्केट कैप $1.6-1.7 ट्रिलियन के करीब है, जो इसे कुबेर का खजाना बनाता है.
उत्पादन में नंबर-1
अरामको की ताकत का असली राज इसके विशाल हाइड्रोकार्बन रिजर्व में छिपा है. यह कंपनी हर दिन औसतन 10-12 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है. साल 2024 में इसका राजस्व लगभग $480 बिलियन रहा. अरामको सिर्फ तेल निकालती ही नहीं, बल्कि तेल शोधन (Refining), पेट्रोकेमिकल्स, लुब्रिकेंट्स और रिटेल सेक्टर में भी इसका बड़ा साम्राज्य है. अब यह कंपनी भविष्य को देखते हुए नेचुरल गैस, LNG और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रही है.
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