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Crude Oil Price : आज क्रूड के रेट में जोरदार तेजी आई है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर क्या गया है. कुवैत द्वारा उत्पादन घटाने के ऐलान के बाद तेल बाजार में आग लगी है. अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से सप्लाई ठप पड़ गई है.
अमेरिकी क्रूड ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 20% की छलांग लगाई है.
नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से कच्चे तेल के बाजार में ‘सुनामी’ आ गई है. सप्लाई रूट बंद होने से खाड़ी देशों द्वारा उत्पादन में की गई अचानक कटौती से कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार चली गई है. सोमवार, 9 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 18% की भारी बढ़त के साथ $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. वहीं, अमेरिकी क्रूड (WTI) ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 20% की छलांग लगाई और $109.5 पर जा टिका.
पिछले सप्ताह अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स 35% तक उछल गए थे, जो 1983 में इस कॉन्ट्रैक्ट की ट्रेडिंग शुरू होने के बाद सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त थी. वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी पिछले सप्ताह 28% बढ़ीं, जो अप्रैल 2020 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है. बाजार के जानकारों का मानना है कि $100 तो सिर्फ एक पड़ाव है. कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अमेरिका के बीच युद्ध नहीं रुका, तो खाड़ी देशों को अपना उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
कुवैत ने उत्पादन घटाया
इस संकट को और गहरा बना दिया ओपेक (OPEC+) देशों के रुख ने. कुवैत, जो दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, उसने शनिवार को उत्पादन घटाने का ऐलान कर दुनिया को चौंका दिया. कुवैत ने इसे ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ में ईरान की धमकियों के खिलाफ एक एहतियाती कदम बताया है.
हालांकि, कुवैत की पेट्रोलियम कंपनी ने यह साफ नहीं किया है कि कटौती कितनी बड़ी है, लेकिन उसने अपने ग्राहकों के लिए ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) घोषित कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण कंपनी अब अपने सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने की कानूनी बाध्यता से मुक्त है. यह वैश्विक खरीदारों के लिए एक बड़ा झटका है.
ओपेक के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक इराक से भी डरावनी खबरें सामने आ रही हैं. दक्षिणी इराक के तीन सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में उत्पादन 4.3 मिलियन बैरल से गिरकर महज 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है. यानी सीधे तौर पर 70% की गिरावट.
जल्द दूर होता नजर नहीं हो रहा होर्मुज संकट
वर्तमान संकट की सबसे बड़ी जड़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य है. हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भरोसा दिलाया है कि जहाजों की आवाजाही जल्द ही सामान्य हो जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि मामला जल्द सुलझता नजर नहीं आ रहा. कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी पहले ही कह चुके हैं कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध नहीं रुका, तो खाड़ी देशों को अपना उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
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