इस योजना के तहत साल 2025-26 में 3,728 कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए 8.95 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. वहीं 2026-27 के लिए 57.50 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है.
क्या मिलेगा कारीगरों को?
कारीगरों को 12 दिन (96 घंटे) का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसमें 2 दिन का उद्यमिता विकास कार्यक्रम भी शामिल होगा, ताकि वे अपना काम बेहतर तरीके से चला सकें. हर लाभार्थी को 4,800 रुपये स्टाइपेंड (400 रुपये रोजाना) मिलेगा. इसके अलावा भोजन के लिए 100 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त सहायता दी जाएगी. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जरूरत के मुताबिक टूलकिट और पैर से चलने वाली सिलाई मशीन भी दी जाएगी.
ओएनडीसी से जुड़ेंगे दिल्ली के कारीगर
योजना की खास बात यह है कि हर कारीगर का ई-कैटलॉग तैयार कर उसे ओएनडीसी (ONDC) प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा. इससे उनके प्रोडक्ट सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे.
प्रमाणपत्र और दूसरी सुविधाएं
पारंपरिक कारीगरों के अनुभव को ‘रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग’ (RPL) के तहत मान्यता दी जाएगी. उन्हें मुख्यमंत्री प्रमाणपत्र और पहचान पत्र मिलेगा. साथ ही MSME रजिस्ट्रेशन, ब्रांडिंग और लोन लेने में भी मदद दी जाएगी
किसे मिलेगा फायदा?
योजना का लाभ 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को मिलेगा. एक परिवार से केवल एक सदस्य पात्र होगा. सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे. आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य रहेगा. शुरुआत में 18,000 ई-श्रम रजिस्टर्ड दर्जियों को प्राथमिकता दी जाएगी. आगे चलकर कुम्हार, बढ़ई, मोची, बुनकर, बांस शिल्पकार, नाई, धोबी और अन्य पारंपरिक व्यवसायों को भी जोड़ा जाएगा.
आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह पहल हजारों परिवारों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएगी.
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