हालांकि इसी दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक कमजोर रहे. Sensex में लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Nifty करीब 3.1 प्रतिशत नीचे आया. बाजार में उतार-चढ़ाव, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण 2025 की शुरुआत काफी अस्थिर रही. पूरे वर्ष के दौरान डीमैट खातों की कुल बढ़ोतरी 3.06 करोड़ रही, जो 2024 में खुले 4.6 करोड़ खातों की तुलना में कम है. इससे साफ है कि बीते साल की तुलना में रफ्तार कुछ धीमी पड़ी थी, लेकिन जनवरी ने फिर से उम्मीद जगा दी है
सस्ती कीमतों ने निवेशकों को किया आकर्षित
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट ने कई शेयरों के दाम को आकर्षक बना दिया है. जब कीमतें नीचे आती हैं, तो लंबे समय के निवेशक इसे अवसर की तरह देखते हैं. बाजार में आई इस गिरावट के बाद कई खुदरा निवेशकों ने सस्ते स्तर पर खरीदारी का मौका तलाशा.
इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए WealthMills Securities में इक्विटी स्ट्रैटेजी के निदेशक क्रांति बाथिनी ने कहा, “डिजिटलीकरण की वजह से इक्विटी बाजार की पहुंच लगातार बढ़ रही है. बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है.” उनका मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और आसान खाता खोलने की प्रक्रिया ने नए निवेशकों को बाजार से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है.
अगर तस्वीर को समग्र रूप से देखें तो साफ दिखाई देता है कि भारतीय निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक और साहसी हो चुके हैं. बाजार गिरने पर घबराने के बजाय वे इसे लॉन्ग टर्म अवसर के रूप में देख रहे हैं.
कैसे-कैसे बढ़ते गए अकाउंट
सितंबर 2024 में नए डीमैट अकाउंट खुलने की संख्या 4.55 मिलियन रही, जो उस समय का काफी ऊंचा स्तर था और यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशकों में शेयर बाजार को लेकर जबरदस्त उत्साह था. इसके बाद अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच यह संख्या कुछ घटी और क्रमशः 3.45 मिलियन, 3.15 मिलियन और 3.26 मिलियन पर रही, लेकिन फिर भी यह स्तर मजबूत माना जा सकता है. जनवरी 2025 से गिरावट का दौर तेज हो गया और नए खातों की संख्या 2.83 मिलियन से घटकर फरवरी में 2.26 मिलियन और मार्च 2025 में 1.84 मिलियन तक पहुंच गई. यह संकेत देता है कि उस समय बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी और भरोसा कमजोर पड़ा था.
हालांकि अप्रैल 2025 से स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला. अप्रैल में 2.22 मिलियन, मई में 2.17 मिलियन, जून में 2.53 मिलियन और जुलाई 2025 में 2.98 मिलियन नए डीमैट खाते खुले, जिससे स्पष्ट होता है कि बाजार में भरोसा वापस लौटने लगा था. अगस्त और सितंबर 2025 में यह आंकड़ा थोड़ा नरम रहा और क्रमशः 2.49 मिलियन तथा 2.46 मिलियन दर्ज किया गया. इसके बाद अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच फिर से तेजी देखने को मिली, जहां अक्टूबर में 3.00 मिलियन, नवंबर में 2.70 मिलियन और दिसंबर में 3.18 मिलियन नए खाते खुले.
जनवरी 2026 में यह संख्या बढ़कर 3.62 मिलियन तक पहुंच गई, जो पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. यह उछाल इस बात का संकेत है कि खुदरा निवेशकों की बाजार में वापसी हो रही है और शेयर बाजार के प्रति उनका भरोसा फिर से मजबूत हो रहा है.
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