बारामती विमान हादसे के बाद DGCA ने कड़ा रुख अपनाया है. VSR Ventures Pvt Ltd के खिलाफ विशेष सेफ्टी ऑडिट में कई खामियां मिलीं. चार Learjet विमानों को तत्काल प्रभाव से ग्राउंड कर दिया गया है. NSOP सेक्टर में अब सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू कर दी गई है.
बारामती हादसे के बाद कड़ा रुख, NSOP सेक्टर में जीरो टॉलरेंस नीति. (Image:AI)
मेंटेनेंस और मौसम प्रशिक्षण पर सख्ती
ऑडिट में यह भी पाया गया कि पुराने और हाल में मालिकाना बदलाव वाले विमानों की निगरानी पर्याप्त नहीं थी. जिन ऑपरेटरों के पास अपनी मेंटेनेंस सुविधा नहीं है, उन्हें अधिकृत संस्थाओं से ही रखरखाव कराने का निर्देश दिया गया है. कई दुर्घटनाओं में मौसम से जुड़ी गलत निर्णय क्षमता एक अहम कारण पाई गई. अब पायलटों की दोबारा ट्रेनिंग में मौसम विश्लेषण और सही निर्णय पर विशेष जोर दिया जाएगा. रियल-टाइम मौसम सूचना प्रणाली और SOP का सख्ती से पालन अनिवार्य किया गया है. पहला फेज-1 ऑडिट मार्च 2026 की शुरुआत तक पूरा होगा, जबकि अन्य ऑपरेटरों के लिए फेज-2 ऑडिट भी किया जाएगा.
NSOP सेक्टर में जीरो टॉलरेंस नीति लागू
हालिया घटनाओं में वृद्धि के बाद DGCA ने सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (NSOPs) के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की. पिछले दशक के दुर्घटना आंकड़ों की समीक्षा में SOP उल्लंघन, कमजोर फ्लाइट प्लानिंग और प्रशिक्षण की कमी प्रमुख कारण पाए गए. DGCA ने स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा को किसी भी व्यावसायिक दबाव, चार्टर या VIP प्रतिबद्धताओं से ऊपर रखा जाएगा. पायलट-इन-कमांड (PIC) का निर्णय अंतिम होगा, चाहे उड़ान को डायवर्ट, विलंब या रद्द करना पड़े. ऐसे निर्णयों पर कोई व्यावसायिक दंड नहीं लगाया जाएगा.
कड़ी निगरानी, सार्वजनिक रैंकिंग और सख्त दंड
अब सभी NSOP ऑपरेटरों को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, मेंटेनेंस इतिहास और पायलट अनुभव सार्वजनिक करना होगा. DGCA पोर्टल पर सेफ्टी रैंकिंग भी जारी की जाएगी. CVR की रैंडम जांच, ADS-B डेटा, ईंधन रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग का क्रॉस-वेरिफिकेशन बढ़ाया जाएगा. अनधिकृत उड़ान या डेटा में हेरफेर पर कड़ी कार्रवाई होगी. FDTL उल्लंघन या न्यूनतम सीमा से नीचे लैंडिंग की स्थिति में पायलट लाइसेंस 5 साल तक निलंबित किया जा सकता है. गैर-अनुपालन पर ऑपरेटरों के लाइसेंस या परमिट भी रद्द हो सकते हैं. DGCA ने साफ कर दिया है कि अब NSOP सेक्टर में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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