घरेलू फ्लाइट से सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाला समय महंगा पड़ सकता है. अप्रैल 2026 से घरेलू उड़ानों की संख्या में कमी आने से टिकट के दाम बढ़ने के संकेत हैं. इसकी बड़ी वजह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की क्षमता में कटौती मानी जा रही है. सीटें कम और मांग ज्यादा रहने से यात्रियों पर सीधा असर पड़ना तय है.
घरेलू हवाई सफर करने वालों को ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है. (Image:AI)
क्षमता घटी, किराया बढ़ना तय
सिरियम की ‘एविएशन मार्केट आउटलुक 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत की घरेलू एयर कैपेसिटी अप्रैल 2025 की तुलना में 2 फीसदी कम रहेगी. यह गिरावट मुख्य रूप से इंडिगो पर DGCA द्वारा लगाए गए 10 फीसदी क्षमता कटौती के कारण है. सिरियम के सीनियर कंसल्टेंट रिचर्ड इवांस का कहना है कि पहले अनुमान था कि भारतीय एविएशन बाजार अगले एक दशक तक सालाना 10 फीसदी की दर से बढ़ेगा, लेकिन इंडिगो के शेड्यूल बिगड़ने से अप्रैल 2026 में ग्रोथ प्रभावित हो गई है. जब उड़ानें नहीं बढ़ेंगी और मांग बनी रहेगी, तो किराया बढ़ना लगभग तय है.
इंडिगो संकट और DGCA की भूमिका
इंडिगो को यह झटका दिसंबर 2025 में लगे ऑपरेशनल संकट के बाद लगा. नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम लागू होने के बाद दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की 5,689 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे हजारों यात्री फंस गए. हालात संभालने के लिए DGCA ने एयरलाइन को 10 फरवरी तक एक बार की राहत दी, लेकिन इसके बावजूद क्षमता में कटौती जारी रही. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने फिलहाल किराए पर सीमा लगाई है, हालांकि भारत में एयरफेयर पूरी तरह बाजार आधारित हैं और गर्मियों का शेड्यूल शुरू होते ही इस पर दोबारा फैसला लिया जा सकता है.
मुनाफा गिरा, जांच के घेरे में इंडिगो
इंडिगो इस समय न केवल ऑपरेशनल बल्कि वित्तीय दबाव में भी है. एयरलाइन का शुद्ध मुनाफा 77.6 फीसदी गिरकर 549.8 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 2,448.8 करोड़ रुपये था. तिमाही नतीजों पर 1,546.5 करोड़ रुपये के असाधारण खर्च का असर पड़ा, जिसमें नए श्रम कानूनों के लिए 969.3 करोड़ रुपये का प्रावधान, ऑपरेशनल बाधाओं से जुड़े 555 करोड़ रुपये और DGCA की 22.2 करोड़ रुपये की पेनल्टी शामिल है. 65 फीसदी मार्केट शेयर के चलते इंडिगो CCI की जांच के दायरे में भी है.
घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए उसकी क्षमता में कमी का असर पूरे सेक्टर पर पड़ना तय है. गर्मी के सीजन में यात्रा मांग बढ़ने वाली है, लेकिन उड़ानें सीमित रहीं तो यात्रियों को महंगे टिकट और कम विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में हवाई सफर पहले से ज्यादा खर्चीला होने के संकेत साफ दिख रहे हैं.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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