सोने की चमक पड़ी फीकी, कमोडिटी बाजार में हाहाकार
केविन वॉर्श के नाम की चर्चा शुरू होते ही धातु बाजारों में भारी मुनाफावसूली देखी गई. शुक्रवार को सोने की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों को डर है कि वॉर्श के नेतृत्व में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख (Hawkish Stance) अपना सकता है. आमतौर पर जब फेड सख्त होता है, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है और वैश्विक तरलता (Liquidity) कम हो जाती है. इसका सीधा असर सोने और अन्य कमोडिटीज पर पड़ता है, जिससे उनकी कीमतें नीचे आ जाती हैं.
बिटकॉइन और क्रिप्टो करेंसी पर बढ़ा दबाव
सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि डिजिटल एसेट और बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर भी केविन वॉर्श की नियुक्ति का साया मंडराने लगा है. बाजार को उम्मीद थी कि भविष्य में मौद्रिक नीतियों में ढील दी जाएगी, लेकिन वॉर्श के आने से इन उम्मीदों को झटका लगा है. बिटकॉइन जैसे जोखिम भरे एसेट्स (Risk Assets) तभी फलते-फूलते हैं जब बाजार में नकदी का प्रवाह अधिक हो और उधार लेना सस्ता हो. अब लिक्विडिटी कम होने की आशंका ने क्रिप्टो निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महंगाई पर वॉर्श का नजरिया
केविन वॉर्श का मानना है कि वर्तमान में फेडरल रिजर्व यह समझने में विफल रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण उत्पादकता में होने वाली बढ़ोतरी महंगाई को कंट्रोल करने में कितनी मददगार हो सकती है. वे केंद्रीय बैंक के ढांचे में बड़े बदलाव के पक्षधर रहे हैं. वॉर्श ने बैंक के बैलेंस शीट को कम करने और बैंकों पर नियामक प्रतिबंधों को ढीला करने की वकालत की है. उनका तर्क है कि अगर फेड अपनी नीतियों को आधुनिक तकनीक और उत्पादकता के साथ जोड़ता है, तो अर्थव्यवस्था को बेहतर गति मिल सकती है.
शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी पर असर
अमेरिकी फेड की नीतियों में संभावित बदलाव की आहट ने भारतीय शेयर बाजार को भी नहीं छोड़ा. शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद गिरावट के साथ बंद हुए. सेंसेक्स 296.59 अंक टूटकर 82,269.78 पर बंद हुआ, जबकि दिन के कारोबार में इसने 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी थी. मेटल और आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई. ग्लोबल सेंटीमेंट बिगड़ने के कारण न केवल भारत, बल्कि हांगकांग, शंघाई और जापान के बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा.
भविष्य की चुनौती: क्या बदल जाएगी फेड की कार्यशैली?
केविन वॉर्श की नियुक्ति अभी सीनेट की मंजूरी के अधीन है, लेकिन इसने पहले ही बहस छेड़ दी है. ट्रंप चाहते हैं कि फेडरल रिजर्व उनके सुझावों पर अमल करे और दरों में तेजी से कटौती करे. वहीं, वॉर्श का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वे बैंकिंग सिस्टम में सुधार और वित्तीय अनुशासन के समर्थक हैं. अब देखना यह होगा कि वॉर्श किस तरह ट्रंप की उम्मीदों और बाजार की स्थिरता के बीच संतुलन बनाते हैं. फिलहाल, वैश्विक बाजार ‘रुको और देखो’ की स्थिति में हैं, जिससे आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
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