पश्चिम रेलवे के मुंबई डिविजन ने ‘कवच v4.0’ सिस्टम 206 किलोमीटर लंबे विरार से सूरत तक के पूरे सेक्शन में लागू कर दी गई है. इस अवसर पर ट्रेन नंबर 20907 सायाजी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर कवच सिस्टम की औपचारिक शुरुआत की गई.
क्या है कवच सिस्टम
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कवच भारत में विकसित स्वदेशी तकनीक है, जिसका मकसद ट्रेनों की टक्कर, सिग्नल तोड़ने और मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है. इस प्रणाली के जरिए अगर लोको पायलट से कोई चूक होती है तो सिस्टम खुद-ब-खुद ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है.
28 स्टेशन और 28 ब्लॉक सेक्शन कवर
विरार–सूरत सेक्शन में कवच सिस्टम के तहत कुल 28 स्टेशन और 28 ब्लॉक सेक्शन कवर किए गए हैं. इसके अलावा, 33 स्थानों पर S-कवच उपकरण लगाए गए हैं, जो सिग्नलिंग सिस्टम से सीधे जुड़े रहते हैं. वहीं, 64 RIU यूनिट्स ऑटो हट्स और ऑपरेटिंग सेंटर्स में स्थापित की गई हैं.
बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया
रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया है. इसके तहत 40 मीटर ऊंचे 33 टावर खड़े किए गए हैं और 412 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल दो अलग-अलग रास्तों में बिछाई गई है, ताकि संचार व्यवस्था हर हाल में बनी रहे. अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा किया गया. मई 2025 में लोको ट्रायल पूरे हुए, अक्टूबर 2025 में स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट (ISA) कराया गया. जनवरी 2026 में रिपोर्ट मिलने के बाद पीसीएसटीई से मंजूरी मिली और इसे औपचारिक रूप से कमीशन कर दिया गया.
विरार से वडोदरा तक लगाया जा रहा है कवच सिस्टम
विरार-सूरत का यह सेक्शन पश्चिम रेलवे के उस बड़े मिशन का हिस्सा है, जिसके तहत विरार से वडोदरा तक कुल 344 किलोमीटर रूट पर कवच सिस्टम लगाया जा रहा है. रेलवे का दावा है कि इसके बाद इस पूरे रूट पर ट्रेन संचालन और अधिक सुरक्षित, नियंत्रित और भरोसेमंद हो जाएगा. रेलवे अधिकारियों ने कहा कि कवच सिस्टम यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम है और इससे रेल दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम होगी.
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