What is Save Act : अमेरिकी सरकार ने सेव एक्ट अभियान शुरू किया है. यह भारत में चल रही एसआईआर जैसी प्रक्रिया है, जो चुनावों में घुसपैठियों को मतदान करने से रोकेगा.
मस्क ने कहा कि सुरक्षित चुनावों के बिना अमेरिका जीवित नहीं रह सकता है. मस्क ने यह बातें रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट की उस पोस्ट के जवाब में कहीं, जिसमें उन्होंने मतदान के नियमों को सख्त बनाने वाले कानून का समर्थन किया था. स्कॉट ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, ‘अगर हमने पिछले कुछ साल में कुछ सीता है तो वह हमारे चुनावों की सुरक्षा, जो बेहद जरूरी है. मैं कुछ साथियों के साथ मिलकर इस बात पर काम कर रहे हैं कि चुनावों में सिर्फ अमेरिकी नागरिक ही वोट डाल सकें. इसके लिए सेव एक्ट अभियान शुरू किया है.’
क्या है सेव एक्ट अभियान
SAVE एक्ट यानी सेफगार्ड अमेरिकन वोट एलिजिबिलिटी एक्ट, जो काफी कुछ भारत सरकार के एसआईआर जैसा है. इसका मकसद अमेरिकी चुनावों में वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करना. बिल के समर्थकों का कहना है कि इससे अवैध मतदान को रोका जा सकेगा और चुनावों में निष्पक्षता आएगी. दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि इससे कुछ पात्र मतदाताओं का नाम सूची से कट सकता है. मस्क ने भी पिछले कुछ समय से अमेरिकी राजनीति में अपनी बात खुलकर रखी है. इस बार चुनावों को बेहतर बनाने के लिए हो रहे प्रयासों का भी समर्थन कर रहे हैं.
क्यों पड़ी सेव एक्ट की जरूरत
आपको याद ही होगा कि साल 2020 के चुनावों के बाद अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई थी. इसमें रूसी दखल के भी आरोप लगे थे. आज भी अमेरिकी सांसद इस बात पर बंटे हुए हैं कि चुनाव की सुरक्षा और लोगों की आसान पहुंच को कैसे बेहतर बनाया जाए. अमेरिका के कई राज्यों ने मतदाता पहचान पत्र, मेल इन बैलेट और मतदाता पंजीकरण से जुड़े कानून भी पास कर दिए हैं और कुछ राज्यों में प्रस्तावित हैं. अब सेव एक्ट के जरिये इसका विस्तार करके पूरे अमेरिका में व्यवस्था लागू करने की कोशिश है.
अभी कहां तक पहुंचा सेव एक्ट का काम
अमेरिकी सरकार ने सेव एक्ट को सदन में पेश कर दिया है. फिलहाल इस एक्ट पर कांग्रेस में बातचीत चल रही है और इसे कानून बनाने के लिए दोनों ही चैंबर से अप्रूवल लेना जरूरी होगा. सेव एक्ट एक तरह से भारत में चल रही एसआईआर प्रक्रिया जैसा है, जिसमें सिर्फ देश के नागरिकों को ही इलेक्टोरल अधिकार दिए जाएंगे. इसका सीधा मकसद घुसपैठियों को मतदान प्रक्रिया में शामिल होने से रोक लगाना है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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