हाल ही में निकासी नियमों को सरल बनाने और यूपीआई से जुड़ी सुविधा लाने की घोषणा के बाद सरकार अब सुधारों के अगले बड़े चरण की तैयारी में है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि ईपीएफओ जल्द ही नया पोर्टल, नया बैकएंड सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा अनुवाद तकनीक अपनाने जा रहा है. इसका मकसद यह है कि अगले 10 वर्षों में सदस्यों की संख्या बढ़ने पर भी सिस्टम बिना अटके सुचारू रूप से काम करता रहे.
सेंट्रलाइज्ड सिस्टम पर काम करेगा संगठन
ईपीएफओ 3.0 के तहत ईपीएफओ अपनी तकनीकी संरचना को बिल्कुल नए सिरे से तैयार करेगा और बैंकिंग की तरह एक केंद्रीकृत प्रणाली अपनाएगा, जिसे कोर बैंकिंग सॉल्यूशन कहा जाता है. जैसे बैंक में ग्राहक देश के किसी भी ब्रांच में जाकर अपना काम करा सकता है, उसी तरह ईपीएफओ का सदस्य भी किसी भी केंद्र से अपनी शिकायत, अपडेट या सेवा ले सकेगा. इससे फाइलें अटकने, अलग-अलग दफ्तरों में भटकने और समय की बर्बादी जैसी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो सकती हैं.
यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब नये लेबर कोड के लागू होने के बाद ईपीएफओ का दायरा संगठित क्षेत्र से निकलकर असंगठित क्षेत्र तक फैल रहा है. जानकारी के मुताबिक, भविष्य में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के फंड का प्रशासन भी ईपीएफओ को सौंपा जा सकता है, जो गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा फंड से अलग होगा. फिलहाल ईपीएफओ के पास करीब 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं और लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कोष ऑपरेट किया जा रहा है. इतने बड़े स्तर पर काम करने के लिए मजबूत और आधुनिक तकनीकी ढांचा बेहद जरूरी माना जा रहा है.
भविष्य की जरूरतों के हिसाब से होगा बदलाव
एक अधिकारी ने कहा, “ईपीएफओ 3.0 के तहत पूरी तरह नया ढांचा तैयार होगा, बैकएंड में कोर बैंकिंग सॉल्यूशन आएगा. इससे हम संगठित और असंगठित, दोनों तरह के कामगारों की बढ़ती संख्या को संभाल सकेंगे. काम का पैमाना बढ़ेगा, इसलिए पूरे सिस्टम में बदलाव जरूरी है. अभी छोटे-छोटे सुधार हो रहे हैं, लेकिन अगला चरण भविष्य की सभी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है.”
सिर्फ तकनीक ही नहीं, भाषा भी इस बदलाव का बड़ा हिस्सा होगी. ईपीएफओ अब चाहता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग अपनी मातृभाषा में जानकारी हासिल कर सकें. इसी उद्देश्य से एआई आधारित ट्रांसलेशन टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा. अधिकारी ने बताया, “हम ‘भाषिणी’ जैसे स्थानीय भाषा टूल्स का उपयोग करेंगे, ताकि सदस्य अपनी भाषा में जानकारी पा सकें.” भाषिणी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विकसित एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा अनुवाद करने वाला प्लेटफॉर्म है, जो अलग-अलग भारतीय भाषाओं में तुरंत जानकारी देने में सक्षम है.
कुल मिलाकर, ईपीएफओ 3.0 का मकसद सिर्फ एक नया पोर्टल बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा डिजिटल सिस्टम तैयार करना है, जो तेज हो, भरोसेमंद हो और देश के हर कामगार तक उसकी भाषा में पहुंचे. अगर यह योजना सफल होती है, तो भविष्य निधि से जुड़े काम पहले से कहीं ज्यादा आसान, पारदर्शी और समय बचाने वाले बन सकते हैं.
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